LIVE PALAMU NEWS DESK : अज्राइल ग्रुप के सैफुल्लाह (जैश कमांडर) व उसके साथी जो खुद को “मौत के फरिश्ता” मानते थें को भी मौत ही नसीब हुई। इस्लामिक धार्मिक मान्यताओं में अज्राइल को मलाक-उल-मौत यानी मौत का फरिश्ता माना जाता है। इस दल में शामिल जैश कमांडर सैफुल्लाह सहित सातों आतंकियों के खत्मे के बाद अब सेना व सुरक्षाबल उनके समर्थकों को निष्क्रिय करने के अभियान में जुटे हैं।

बताया जा रहा है कि स्थानीय सहयोग से ही यह आतंकी दुर्गम इलाकों में गश्त कर रहे सुरक्षाबलों पर ऊंचाई वाले क्षेत्रों से हमला कर उन्हें नुकसान पहुंचाता था। 2024 को सीमा पार से घुसपैठ कर आया यह आतंकी दल सुरक्षाबलों पर हमला कर भाग जाया करता था। स्थानीय सहयोग से उन्हें छिपने के ठिकानों में खाने, पीने व अन्य सामान की कोई कमी नहीं होती थी। घटना के बाद ये आतंकी घटना लंबे समय के लिए अपने बिल में घुस जाते थे।
जम्मू के पीआरओ डिफेंस लेफ्टिनेंट कर्नल सुनीत बर्तवाल ने कहा कि आतंकियों के खिलाफ इस्तेमाल कुशल रणनीति से किश्तवाड़ में आतंकी नेटवर्क को गहरा आघात पहुंचा है।कठिन हालातों में भी मिलकर काम करते हुए सेना, सुरक्षाबलों ने इन आतंकियों को एक स्थान पर सीमित रख यह सुनिश्चित किया कि वे वहां से निकल न पाएं। तत्पश्चात संयम, समन्वय से उन्हें मार गिराया। अब बचे हुए आतंकियों को भी बख्शा नहीं जाएगा।