राणा अरुण कुमार सिंह के प्रभावशाली प्रस्तुतिकरण की हुई सराहना, कुलपति ने कहा- ‘शोध समाज और ज्ञान के विकास की धुरी है’
मेदिनीनगर: नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कौटिल्य भवन स्थित सभागार में आज पीएचडी की फाइनल मौखिकी परीक्षा (Final Viva Voce) का सफल आयोजन हुआ। इस अवसर पर शोध के क्षेत्र में नई दृष्टि प्रस्तुत करते हुए दो शोधार्थियों ने अपने-अपने विषयों पर प्रभावशाली व विद्वत्तापूर्ण प्रस्तुतिकरण दिया, जिसे विशेषज्ञों ने अत्यंत सराहा।

प्रथम शोधार्थी के रूप में राणा अरुण कुमार सिंह ने अपने शोध निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह (सहायक प्राध्यापक, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय) के मार्गदर्शन में किए गए शोध कार्य का विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। श्री सिंह द्वारा प्रस्तुत शोध की दृष्टि, विश्लेषणात्मक गहराई और विषय की प्रासंगिकता ने उपस्थित विद्वानों को प्रभावित किया। विशेषज्ञों ने उनके कार्य को ‘सार्थक और अनुसंधान की दिशा में अनुकरणीय’ करार दिया तथा पीएचडी डिग्री प्रदान करने की अनुशंसा की।

द्वितीय शोधार्थी उपेंद्र राम ने अपने शोध निर्देशक डॉ. अखिलेश पांडेय के निर्देशन में तैयार किए गए अपने शोध कार्य का शैक्षणिक प्रस्तुतिकरण दिया। उनका शोध भी उच्च गुणवत्ता एवं अनुसंधानपरक दृष्टिकोण का परिचायक रहा।
इस परीक्षा की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश कुमार सिंह ने की।
बाह्य परीक्षक के रूप में डॉ. अविनाश कुमार झा (पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, इतिहास विभाग)और डॉ. राकेश कुमार (पाकुड़ विश्वविद्यालय, इतिहास विभाग) उपस्थित रहे, जिनकी उपस्थिति ने परीक्षा की पारदर्शिता और शैक्षणिक गरिमा को और सुदृढ़ बनाया।
कुलपति प्रो. सिंह ने दोनों शोधार्थियों को आशीर्वचन देते हुए कहा, ‘शोध केवल डिग्री प्राप्त करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज और ज्ञान के विस्तार की धुरी है। विश्वविद्यालय अपने शोधार्थियों के कार्यों को प्रकाशन के माध्यम से सार्वजनिक करेगा ताकि समाज को इसका सीधा लाभ मिले।’
उन्होंने शोधार्थियों को नये अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने और ज्ञान-विस्तार में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर डीन , सामाजिक विज्ञान संकाय डॉ नीता कुमारी सिन्हा, विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों में डॉ. ए.के. पांडे, डॉ. वीरेंद्र, डॉ संगीता कुजूर, डॉ. संजय कुमार बारा, भावना सिंह सहित अनेक प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष एवं अकादमिक सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने दोनों शोधार्थियों के कार्य की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम पूर्णतः शैक्षणिक वातावरण, गंभीरता और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ, जो नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय की उच्च शैक्षणिक परंपरा व अनुसंधान-उन्मुख नीति का परिचायक रहा।