LIVE PALAMU NEWS DESK : देश में वर्ष 2027 में जनगणना की जाएगी और यह पहली बार होगा जब यह पूरी तरह डिजिटल रूप से होगी। मंगलवार को गृह मंत्रालय ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में इसकी पुष्टि की। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि डेटा कलेक्शन मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जाएगा। इस कदम के बाद भारत अमेरिका, ब्रिटेन, घाना और केन्या जैसे देशों की श्रेणी में खड़ा होगा। जहां डिजिटल या हाइब्रिड जनगणनाएं पहले ही हो चुकी हैं।


बता दें कि हर दशक में भारत में जनगणना होती है, जो जनसांख्यिकीय, सामाजिक, आर्थिक और अब जाति-आधारित डेटा एकत्र करती है। 1872 में पहली गैर-समकालीन जनगणना हुई थी। स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना 1951 में हुई। 2011 की आखिरी पूर्ण जनगणना के बाद 2021में कोविड-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया। उसके बाद चुनाव, प्रशासनिक देरी और सीमाओं को फ्रीज करने की समयसीमा बढ़ने से यह 2027 तक खिसक गई।

2027 में होनेवाली जनगणना भारत की 16वीं जनगणना होगी, जो दो चरणों में होगी:

चरण 1: घर सूचीकरण और हाउस मैपिंग – अप्रैल से सितंबर 2026 तक।

चरण 2: जनसंख्या गणना – फरवरी-मार्च 2027 (बर्फीले क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान)।
नए पहलू:

पूरी तरह डिजिटल: पारंपरिक कागजी फॉर्म के बजाय गणनाकारक (इनुमरेटर) अपने स्मार्टफोन (एंड्रॉयड/आईओएस) पर ऐप इस्तेमाल करेंगे। नागरिक वेब पोर्टल के जरिए स्व-गणना (सेल्फ-इनुमरेशन) कर सकेंगे।

जाति गणना: स्वतंत्र भारत में पहली बार एससी/एसटी के अलावा अन्य जातियों का डेटा एकत्र किया जाएगा। आखिरी पूर्ण जाति गणना 1931 में हुई थी।

भाषाई समावेशिता: ऐप 16 भाषाओं में उपलब्ध होगा।

हाइब्रिड फॉर्मेट: कनेक्टिविटी की समस्या वाले क्षेत्रों में कागजी फॉर्म का बैकअप भी होगा।

यह जनगणना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत सीमांकन (डिलिमिटेशन), आरक्षण नीतियों, एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस) और महिलाओं के 33% आरक्षण के लिए आधार बनेगी।

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