मेदिनीनगर : हिंदी साहित्य भारती के तत्वावधान में बुधवार को स्थानीय निर्वाणा रेड होटल में कवि राकेश कुमार द्वारा संपादित साझा काव्य संकलन ‘चलें छंद की ओर’ का भव्य और गरिमामय लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। यह संकलन सात रचनाकारों ने मिलकर रची है। जिसमें अनुपमा तिवारी, रीना प्रेम दूबे, सत्येन्द्र कुमार चौबे, रमेश कुमार सिंह, अनुज कुमार पाठक, नीरज कुमार पाठक एवं राकेश कुमार के दोहों से सुसज्जित है। कार्यक्रम की अध्यक्षता छंदशास्त्री श्रीधर द्विवेदी ने की, जबकि संचालन विद्या वैभव ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में साहित्यकार सुरेन्द्र प्रसाद मिश्र उपस्थित रहे। समारोह में शिक्षाविद शंभूनाथ पाण्डेय, पाटन बीडीओ अमित कुमार झा, डॉ. सुशील कुमार पाण्डेय, डॉ. आर.के. रंजन, लेखक सुरेन्द्र कुमार मिश्र, काष्ठ कलाकार प्रेम भसीन, युवा नेता व शिक्षाविद अविनाश देव, अमृत कौर, धनंजय जयपुरी, अरुण अग्रवाल, सुरेश विद्यार्थी, अवकाश प्राप्त सीओ संतोष शुक्ला, के.के. मिश्र, प्रभात मिश्र ‘सुमन’, डॉ. राम किंकर त्रिवेदी, पंकज श्रीवास्तव एवं विद्या सागर शर्मा ने संयुक्त रूप से पुस्तक का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में अनुपम स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड कम्युनिकेशन की छात्राओं ने सरस्वती वंदना पर मनोहारी नृत्य प्रस्तुति दी। स्वागत उद्बोधन डॉ. रामप्रवेश पंडित ने किया, विषय प्रवेश शिक्षक परशुराम तिवारी ने कराया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. धनंजय पाठक ने किया। मुख्य अतिथि सुरेन्द्र प्रसाद मिश्र ने संकलन के रचनाकारों को बधाई देते हुए दोहों का सम्यक विश्लेषण किया और कहा कि ‘चलें छंद की ओर’ बहुरंगी भावों, संवेदनाओं और संदेशों का समाहार है।

उन्होंने कवि राकेश कुमार के संपादन व संयोजन की मुक्त कंठ से सराहना की। प्रख्यात लेखक सुरेन्द्र कुमार मिश्र ने कहा कि पुस्तक में शामिल सभी कवियों के अपने-अपने रंग, रूप, सुगंध और आभा हैं, जो दोहों के एक ही उद्यान में खिले हुए हैं। उन्होंने सामाजिक परिवर्तन के लिए साहित्य के व्यापक प्रसार पर बल दिया। शिक्षाविद सह समाजसेवी शंभूनाथ पाण्डेय ने कहा कि इस संकलन ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि पलामू की धरती साहित्यिक दृष्टि से अत्यंत उर्वर है। वहीं पाटन बीडीओ अमित कुमार झा ने कबीर के दोहे उद्धृत करते हुए कहा कि हिंदी भाषा का स्वरूप और स्वभाव समावेशी है, और यह पुस्तक उसी समावेशी भाव को प्रस्तुत करती है। डॉ. आर.के. रंजन ने कहा कि ‘चलें छंद की ओर’ हिंदी साहित्य के पटल पर एक नया अध्याय है। माटी कला बोर्ड के सदस्य अविनाश देव ने कहा कि इस कृति में साहित्य की अंतर्निहित शक्तियां स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं और ऐसे कार्यक्रमों को छात्रों तक भी ले जाना चाहिए। विदुषी अमृत कौर ने कहा कि यह सुखद है कि दोहों में पर्यावरण जैसे विषयों को स्थान दिया गया है, लेकिन प्रदूषण की त्रासदी से मुक्ति के लिए और अधिक सृजनात्मक प्रयासों की आवश्यकता है। उड़ान आईएएस एकेडमी के निदेशक अरुण अग्रवाल ने अपनी कविता के माध्यम से सातों रचनाकारों को साहित्यिक आकाश के चमकते सितारे बताया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा मंच के प्रियरंजन पाठक ‘समर्पण’, मानस मिश्र एवं प्रेम प्रकाश दूबे ने सातों रचनाकारों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में एम.जे. अजहर, अमीन रहबर, श्यामलाल उरांव, छेदी नंदन मिश्र, विजय पाठक ‘द्विज’, सिद्धेश्वर सिंह, अशोक मिश्र, घनश्याम कुमार, सुनील विश्वकर्मा, शीला श्रीवास्तव, राहुल सिंह, अश्लेष पांडेय, ललन प्रजापति, अशोक चौबे, अमन चक्र, उदय भानु तिवारी, ऋषु प्रिय, प्रेम प्रकाश, सुरेन्द्र चंद्रवंशी ‘सचेत’, रथिंद्र नाथ झा, मिंटू प्रसाद, कुमार अखिलेश, आदर्श राज, विजय कुमार ठाकुर सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।