मेदिनीनगर : राज्य सरकार की सामाजिक कुरीति निवारण योजना, विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, बाल विवाह मुक्त झारखंड एवं मिशन शक्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बुधवार को प्रखंड परिसर, छतरपुर में अनुमंडल स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य समाज में व्याप्त बाल विवाह, डायन प्रथा, महिला हिंसा जैसी कुरीतियों के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना था।


कार्यक्रम का उद्घाटन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, पलामू, मुखिया संघ अध्यक्ष छतरपुर, बीडीओ छतरपुर, बीडीओ पिपरा, बीडीओ नौडीहा बाजार, बीडीओ हरिहरगंज, राज्य समन्वयक अमित कुमार एवं विभिन्न धर्मगुरुओं द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। अतिथियों का स्वागत महिला पर्यवेक्षिकाओं एवं जेंडर सीआरपी के द्वारा पौधा भेंट कर किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, पलामू नीता चौहान ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया और कार्यशाला के उद्देश्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई के उन्मूलन हेतु केंद्र सरकार द्वारा 100 दिवसीय जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार बालिकाओं की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष एवं बालकों की 21 वर्ष निर्धारित है, इससे कम उम्र में विवाह कराना दंडनीय अपराध है। उन्होंने आमजन से अपील की कि बाल विवाह की किसी भी सूचना को टोल फ्री चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 अथवा पुलिस हेल्पलाइन 112 पर अवश्य दें।

बीडीओ हरिहरगंज ने डायन प्रथा पर अपने संबोधन में कहा कि समाज में विधवा, असहाय एवं कमजोर महिलाओं पर अक्सर डायन होने का आरोप लगाया जाता है, जो घोर अमानवीय कृत्य है। उन्होंने डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम, 2001 की जानकारी देते हुए बताया कि किसी महिला को डायन बताकर प्रताड़ित करने पर तीन माह तक का कारावास, एक हजार रुपये जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। इसके अंतर्गत किसी महिला को डायन कहना, सोचना या उसके साथ अमानवीय व्यवहार करना भी अपराध की श्रेणी में आता है।

कार्यशाला में यूनिसेफ के रिसोर्स पर्सन द्वारा मिशन शक्ति के अंतर्गत संचालित योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि मिशन शक्ति के तहत बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सखी वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन, शक्ति सदन, पालना योजना आदि का संचालन किया जा रहा है।

सखी वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से हिंसा से पीड़ित महिलाओं को चिकित्सीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श, पुलिस सहायता, विधिक परामर्श एवं अल्पावधि आश्रय जैसी सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके साथ ही महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं प्रदान की जाती हैं।

उन्होंने इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, सावित्रीबाई किशोरी समृद्धि योजना, राज्य विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना, सामूहिक विवाह कार्यक्रम, सामूहिक अंतिम संस्कार योजना एवं दिव्यांग कल्याणार्थ योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को आर्थिक व सामाजिक संबल प्रदान करना है।

बीडीओ नौडीहा बाजार ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए शिक्षा का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना की जानकारी देते हुए बताया कि बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने, ड्रॉप-आउट दर कम करने एवं बाल विवाह रोकने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा कक्षा 8 से कक्षा 12 तक की किशोरियों को एकमुश्त 40,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है।

साथ ही उन्होंने कन्यादान योजना के तहत विवाह के बाद एक वर्ष के भीतर निबंधन कराने पर 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की जानकारी दी। बीडीओ छतरपुर ने कहा कि बाल विवाह न केवल एक गंभीर सामाजिक बुराई है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है। इसके लिए दोषियों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना एवं दो वर्ष तक का कारावास का प्रावधान है।

उन्होंने महिलाओं के प्रति किसी भी प्रकार की हिंसा, शोषण एवं अमानवीय व्यवहार को समाज के लिए घातक बताते हुए इसके खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।
बीडीओ पिपरा ने प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रथम बार गर्भवती एवं प्रसूति महिला को दो किस्तों में 5,000 रुपये की सहायता दी जाती है, जबकि द्वितीय संतान बेटी होने पर 6,000 रुपये की एकमुश्त राशि प्रदान की जाती है।

कार्यक्रम में उपस्थित धार्मिक गुरु कुंदन पाठक ने डायन शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि “डा + इन” जलन एवं नकारात्मक भावना का प्रतीक है, जिसे जागरूकता एवं शिक्षा के माध्यम से समाप्त किया जा सकता है। वहीं धार्मिक गुरु मोहम्मद आफताब ने किशोर-किशोरियों के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए उन्हें शिक्षा, अधिकार एवं आत्मनिर्भरता से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

समाजसेवी अरविंद गुप्ता, छतरपुर ने कहा कि बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित करना समय की मांग है। उन्होंने बताया कि पूर्व में छतरपुर क्षेत्र में डायन प्रथा से जुड़े मामले प्रतिदिन सामने आते थे, लेकिन अब स्थिति में काफी सुधार हुआ है। फिर भी कुछ क्षेत्रों में अभी बदलाव की आवश्यकता है, जिसे निरंतर जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से संभव बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान मासूम आर्ट केंद्र द्वारा नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर बाल विवाह के कानूनी प्रावधानों, दुष्प्रभावों एवं सामाजिक नुकसान को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों को “बाल विवाह मुक्त झारखंड” की शपथ दिलाई गई।

जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने बताया कि यह 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त अभियान, निदेशक समाज कल्याण सह परियोजना निदेशक, झारखंड महिला विकास समिति के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है, जो झारखंड में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

ये रहे उपस्थित :

इस अवसर पर सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, मुखियागण, जिला परियोजना सहायक, निरंजन कुमार गुप्ता (आभा), सी-3 से आकाश कुमार, यूनिसेफ रिसोर्स पर्सन सुमन कुमारी, राज्य समन्वयक अमित कुमार, महिला पर्यवेक्षिकाएं, पंचायत सचिव, जेएसएलपीएस बीपीएम, जेंडर सीआरपी, आंगनबाड़ी सेविकाएं, धर्मगुरु एवं अन्य संबंधित कर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित थें।

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