LIVE PALAMU NEWS DESK: राज्यसभा में जीरो आवर के दौरान बुधवार को आम आदमी पार्टी के MP राघव चड्ढा ने “राइट टू रिकॉल” सिस्टम लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर चुने हुए प्रतिनिधियों का परफॉर्मेंस खराब है, तो वोटर्स को उनके पांच साल का टर्म पूरा होने से पहले उन्हें हटाने का अधिकार होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों को पार्लियामेंट और लेजिस्लेटिव असेंबली के मेंबर चुनने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन वोटर्स के पास अब तक नाकाबिलियत या गलत काम के आधार पर उन्हें टर्म के बीच में हटाने का कोई सीधा सिस्टम नहीं है।
“राइट टू रिकॉल” सिस्टम से वोटर्स किसी चुने हुए प्रतिनिधि को कानूनी तौर पर हटाने की इजाजत देगा। उन्होंने कहा कि भारत में पहले से ही प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट और जजों के खिलाफ इंपीचमेंट और सरकारों के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाने का सिस्टम है।
चड्ढा ने कहा कि एमपी और एमएलए के लिए पर्सनल अकाउंटेबिलिटी का प्रिंसिपल लागू करने से डेमोक्रेटिक ओवरसाइट मजबूत होगी। उन्होंने यूनाइटेड स्टेट्स और स्विट्जरलैंड समेत दुनिया भर में 20 से ज़्यादा डेमोक्रेसी का ज़िक्र किया, जहां चुने हुए प्रतिनिधियों को हटाने के लिए सिस्टम मौजूद हैं।
उन्होंने पॉलिटिकल गलत इस्तेमाल या अस्थिरता को रोकने के लिए सेफगार्ड की भी जरूरत का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव के बाद वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले कम से कम 18 महीने का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड भी होना चाहिए। इस तरह की व्यवस्था राजनीतिक दलों को मजबूत उम्मीदवारों को नामित करने, जवाबदेही बढ़ाने और भ्रष्टाचार को कम करने में मदद करेगी।