LIVE PALAMU NEWS DESK : झारखंड हाईकोर्ट ने कुख्यात गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव और उनकी साथियों की हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पांच सजायाफ्ता आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने हजारीबाग की निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को निरस्त कर तत्काल रिहाई का आदेश दिया।

उल्लेखनीय है कि 2 जून, 2015 को सुशील श्रीवास्तव और उसके दो सहयोगियों को कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही AK-47 से भून दिया गया था। हजारीबाग निचली अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी माना था और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। विभिन्न धाराओं में जुर्माना भी लगाया गया था।
मामले में कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से पांच को दोषी ठहराया गया, जबकि एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दोषियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब हाईकोर्ट ने यह फैसला पलट दिया है।
जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे आज सुनाते हुए विकास तिवारी, संतोष पांडे, विशाल कुमार सिंह, राहुल देव पांडे और दिलीप साव को तत्काल प्रभाव से रिहा करने का आदेश दिया गया है।
बता दें कि जून 2015 में सुशील और उसके दो साथियों को जेपी जेल से हजारीबाग सिविल कोर्ट लाया गया था। सुबह के करीब 11 बजे पूरा कोर्ट परिसर गोलियों की आवाज से गूंज गया। एके-47 से ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गई थीं। सुशील के साथ-साथ ग्यास खान और कमाल खान की मौत हो गई थी। दिनदहाड़े हुई इस घटना से पूरा इलाका दहल गया था। निचली अदालत में मामले की सुनवाई करीब पांच साल चली। 2020 में फैसला आया और 5 आरोपियों को दोषी माना गया। इन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
कौन था गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव :
झारखंड के चतरा निवासी गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव ने कोयला वाले इलाकों में दहशत से अपना वर्चस्व कायम कर लिया था। इन इलाकों में उसके नाम तक से लोग कांपने लगे थे। यहां तक कि जेल में रहते हुए भी वह क्राइम की दुनिया में अपनी बादशाहत बनाए हुए था। पुलिसवाले तक उसे सम्मान के साथ ‘बाबा’ कहते थे।
कहा जाता है कि 90 के दशक में उसने ठेकेदार बनने की कोशिश की थी, लेकिन तत्कालीन पीडब्ल्यूडी इंजीनियर से उसे अपमान ही मिला। इसके बाद उसने अपराध की दुनिया में एंट्री करने की ठान ली। उसने उस समय के डॉन भोला पांडे का हाथ थाम लिया और बड़ी-बड़ी वारदातों को अंजाम देता रहा।