LIVE PALAMU NEWS DESK : सोमवार को झारखंड हाई कोर्ट में प्रार्थी नकुल सिंह की हेवीयस कार्पस याचिका पर सुनवाई की। उक्त सुनवाई न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायाधीश संजय प्रसाद की खंडपीठ ने की। इह मामले में प्रार्थी नकुल सिंह ने अदालत को बताया कि विगत 15 जनवरी को रांची से लातेहार काम करने गए उनके पुत्र को 15-20 पुलिसवाले उठा कर ले गएं।

इसकी जानकारी हेतु जब वह 16 जनवरी को थाना पहुंचे व बेटे की जानकारी मांगी तो पुलिस ने बेटे को कोर्ट भेजे जाने की बात कही। तत्पश्चात लातेहार कोर्ट में भी पुत्र से संबंधित कोई जानकारी नहीं मिली। जिस कारण बेबस पिता फिर से पुलिस के पास पहुंचे जहां उन्हें बताया गया कि उनके पुत्र को जेल भेज दिया गया।

जिसके बाद पिता ने गुमराह होकर लातेहार जेल से लेकर हजारीबाग और रांची जेल में पता लगाया। लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली। जिसके बाद उन्होंने रूख किया लातेहार मजिस्ट्रेट की ओर। जहां 22 जनवरी को पहली सुनवाई होती है। लातेहार पुलिस अधीक्षक एवं अन्य पुलिस अधिकारियों से इस बाबत जवाब मांगे जाने पर पुलिस द्वारा समय की मांग की जाती है।

इधर, नकुल सिंह ने पुलिस पर यह आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें शिकायत करने के अगले दिन बुलाती है और पुत्र को छोड़ने के एवज में सादे पन्ने पर साइन करवा लेती है। वहीं मजिस्ट्रेट कोर्ट में अगली सुनवाई में पुलिस यह बताती है कि नकुल सिंह ने अपने पुत्र के लापता होने की प्राथमिकी दर्ज कराई है। जिस कोरे पन्ने पर उनके हस्ताक्षर लिए गए थे. वहां पर प्राथमिकी से जुड़ी शिकायत लिखी होती है। जिसके बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट से मामला खत्म हो जाता है।

 

जिसके बाद अंततः पिता थक हार कर झारखंड हाई कोर्ट का रुख करते हैं। नकुल सिंह के अधिवक्ता आशुतोष रंजन कुमार ने बताया कि नकुल सिंह के पुत्र 15 जनवरी से गायब है और मजिस्ट्रेट कोर्ट में पहली सुनवाई 22 जनवरी को होती है। वहीं पुलिस द्वारा मजिस्ट्रेट कोर्ट में दिए गए सफाई में 23 तारीख के प्राथमिकी का जिक्र है।

प्राथमिकी में उनका हैंडराइटिंग भी मैच नहीं करता, हालांकि आज की सुनवाई में लातेहार पुलिस से जानकारी लेने के लिए राज्य सरकार के अधिवक्ता ने समय की मांग की है। जिस पर अदालत में कल इस मामले की सुनवाई मुकर्रर की है।

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