लाइव पलामू न्यूज: श्राद्ध पक्ष की अवधि को पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए विशेष होती है। यह अवसर वंशजों को श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे अनुष्ठानों के माध्यम से अपने पूर्वजों को याद करने का अवसर देता है। आश्विन माह में कृष्ण पक्ष की प्रथम तिथि से लेकर अमावस्या तक चलने वाला श्राद्ध पक्ष में अमावस्या का विशेष महत्व होता है। सर्वपितृ अमावस्या को भूले बिसरे सभी पितृगणों का श्रद्धा पूर्वक श्राद्ध करना चाहिए।अगर किसी को अपने किसी पितृ की तिथि याद नहीं रहती है तो अमावस्या को श्रद्धा से श्राद्ध निकालकर उनका तर्पण किया जाता है।

इस वर्ष सर्व पितृ अमावस्या 02 अक्तूबर को है। इस दिन पितरों और भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने का विधान है। सर्व पितृ अमावस्या पर किए गए श्राद्ध, तर्पण और दान से पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है। उनकी कृपा से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। यह दिन पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने का अद्भुत अवसर होता है, जिससे जीवन के सभी क्षेत्रों में शुभता और सकारात्मकता आती है। इस दिन कुछ विशेष उपाय कर आप अपने पितरों का आशीर्वाद पा सकते हैं।

तिल के लड्डू का भोग:-

तिल का लड्डू बनाएँ और इसे मंदिर में चढ़ाएँ। इसके अलावा, मन ही मन अपनी इच्छा रखते हुए कौओं, गायों और कुत्तों को लड्डू खिलाएं।

उत्तर-पूर्व में दीपक जलाएं:

उत्तर-पूर्व दिशा में सर्व पितृ अमावस्या के दिन अपने पूर्वजों को याद करते हुए दीपक जलाएं।

श्राद्ध और तर्पण करें:

अपने पूर्वजों के सम्मान में श्राद्ध और तर्पण अनुष्ठान करें, क्योंकि इसे बहुत लाभकारी माना जाता है। इस दिन पूजा और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

देवी लक्ष्मी के लिए घी का दीपक:

देवी लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं और उनके मंत्र का 108 बार जाप करें।

घर के आंगन या तुलसी के पौधे के पास दीप जलाकर पितरों का स्मरण करना चाहिए। दीप जलाने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।

पितरों को प्रसन्न करने के लिए सर्वपितृ अमावस्या के दिन खीर, चावल और तिल से बने व्यंजनों का भोग लगाना चाहिए। इसे घर के आंगन या छत पर कौवों को खिलाना शुभ माना जाता है, क्योंकि कौवों को पितरों का प्रतीक माना गया है। इस भोग से पितर तृप्त होते हैं और परिवार पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं।

सर्वपितृ अमावस्या के दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं। अन्नदान, वस्त्रदान, तिलदान और भोजनदान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। खासकर काले तिल, उड़द, लोहे की वस्तुएं और पका हुआ भोजन दान करना अत्यधिक शुभ माना गया है।

सर्वपितृ अमावस्या पर पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु या भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए। विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भागवत गीता का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने से भी पितृदोष की शांति होती है। इस दिन पीपल के पेड़ को जल चढ़ाकर तीन बार परिक्रमा करना भी शुभ फलदाई होता है।

 

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