लाइव पलामू न्यूज: चिलखारी नरसंहार के 17 वर्ष बीत चुके हैं। बावजूद इसके आज भी लोगों के जेहन में उस काली रात का साया इस कदर मंडरा रहा है कि लोग सिहर उठते हैं। बता दें कि 26 अक्टूबर 2007 की रात में नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर 20 लोगों की हत्या कर देवरी की धरती को दूसरी बार रक्तरंजित कर दिया था। घटना उस वक्त हुई जब गांव के मैदान पर फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। फुटबॉल प्रतियोगिता के समापन पर आदिवासी जतरा सोरेन ओपेरा का कार्यक्रम चल रहा था। जिसमें अपनी प्रस्तुति देने बोकारो से आये 85 कलाकार आएं थें, वे जतरा प्रस्तुत कर रहें थें।

 

इसी दौरान मध्य रात्रि में जब कार्यक्रम अपने चरम पर था इसी दौरान भाकपा माओवादियों का दस्ता चिलखारी पहुंचा और कार्यक्रम स्थल को कब्जे में कर भाकपा माओवादी के कुछ सदस्य स्टेज पर चढ़ कर स्टेज पर लगे माइक से बाबूलाल मरांडी के भाई नुनूलाल मरांडी को समर्पण करने की घोषणा की। जबतक लोग कुछ समझ पाते और संभलते माओवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दिया।

जिससे कार्यक्रम में अगली पंक्ति में बैठे लोग मारे गये। मृतकों में पूर्व मुख्य्मंत्री बाबूलाल मरांडी के पुत्र अनूप मरांडी, छात्र नेता सुरेश हांसदा, अजय सिन्हा उर्फ पोपट (गिरिडीह), मुन्ना हेंब्रम, (चिलखारी), मनोज किस्कू (दुम्माटांड़) रशिक बासके, दिनेश वर्मा (बदवारा, बेंगाबाद) उसमान अंसारी (एकद्वारी), अनिल अब्राहम मरांडी (करकाटांड़), सुशील सोरेन (पन्ना बिहार), केदार हेंब्रम (महतोधराण), चरकू हेंब्रम, सोनाराम हेंब्रम, दीपक हेंब्रम, सुरेश टुडू, गंगाराम टुडू, अनूप मुर्मू, व दिलखुश सिंह का नाम शामिल था। वहीं गोली लगने से गंभीर रूप से घायल दिनेश वर्मा की मौत इलाज के लिए गिरिडीह ले जाने के दौरान रास्ते में हो गयी।वहीं एक अन्य घायल पार्वती बास्के (ग्राम लक्षुआडीह) की मौत इलाज के दौरान रांची में हो गयी। वहीं कार्यक्रम स्थल पर मौजूद बाबूलाल मरांडी के भाई नुनूलाल मरांडी बाल-बाल बच गए थें।

इधर इस घटना के बाद दिशोम गुरु शिबू सोरेन, तत्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, तत्कालीन पुलिस महानिदेशक बीडी राम आदि घटनास्थल पर पहुंचे और मृतक के आश्रितों को नौकरी, एक-एक लाख रुपये सहित इंदिरा आवास, लाल कार्ड व चिलखरियोडीह में एक स्टेडियम का निर्माण करवाने की घोषणा की गयी थी। इस घटना ने लोगों के दिल में इतनी दहशत और टीस दी कि आज भी लोग इसे याद कर कांप उठते हैं।

 

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