लाइव पलामू न्यूज: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। यह दीपावली के दो दिन बाद आने वाला ऐसा पर्व है, जो भाई के प्रति बहन के प्रेम को अभिव्यक्त करता है। बहनें अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती हैं। भाई दूज पूरे भारत में कई नामों से मनाया जाता है, जिसमें महाराष्ट्र में भाऊ बीज, कुछ उत्तरी क्षेत्रों में भातृ द्वितीया, भाई द्वितीया और दक्षिणी राज्यों में भातृ द्वितीया कहा जाता है।
यम द्वितीया पर यमराज को प्रसन्न करने के लिए बहनें व्रत भी रखती हैं। भाई दूज के मौके पर बहनें, भाई के तिलक और आरती के लिए थाल सजाती है। जिसमें कुमकुम, सिंदूर, चंदन,फल, फूल, मिठाई और सुपारी आदि सामग्री होती है। भाई दूज पर शाम के समय घर के बाहर बाईं ओर मिट्टी के कलश में जल भरकर रखें। इसके ऊपर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं। उनसे प्रार्थना करें कि घर में रहने वाले सभी लोग दीर्घायु और स्वस्थ हो। अगले दिन सुबह कलश का जल घर के प्रत्येक कोने में छिड़क दें।
कथा:
पौराणिक कथाओं के अनुसार पौराणिक कथा के अनुासर, सूर्यदेव के पुत्र यमराज और पुत्री यमुना थी। यमराज को अपनी बहन यमुना से बेहद लगाव था। यमुना अपने भाई से बार-बार घर आने का निवेदन करती थी। लेकिन अधिक काम होने की वजह से वह समय पर अपनी बहन से मिलने नहीं जा पाते थे। यमुना के बार- बार आग्रह करने पर यमराज ने यमुना को वचन दिया कि वह कार्तिक माह की शुक्ल द्वितीया तिथि पर यमुना से मिलने उनके घर आएंगे। लेकिन यमराज को यमुना के घर जाने में थोड़ा संकोच हो रहा था क्योंकि वह लोगों के प्राणों को हरते हैं।
बावजूद वह यमुना के घर चले जाते हैं। जब यमराज बहन के घर पहुचें, तो वह भाई को देख बेहद प्रसन्न हुई। यमुना ने अपने भाई के लिए कई तरह के पकवान बनाए। बहन की सेवा से यम बेहद प्रसन्न हुए और यमुना से वर मांगने को कहा। जिसके बाद यमुना ने उनसे वचन लिया कि हर साल कार्तिक माह के शुक्ल द्वितीया तिथि पर वह उनके घर आकर भोजन किया करें। साथ ही इस दिन अगर भाई-बहन दोनों एक साथ यमुना नदी में स्नान करें तो उन्हें मुक्ति प्राप्त होगी।इसी कारण से इस इन यमुना नदी में भाई-बहन के साथ स्नान करने का बड़ा महत्व है।
एक अन्य कथा के अनुसार, राक्षस नरकासुर को मारने के बाद, भगवान कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गए। सुभद्रा ने भगवान कृष्ण के माथे पर तिलक लगाया और तब से यह दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाता है।
