लाइव पलामू न्यूज: 15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग होकर ‘झारखंड’ राज्य का गठन किया गया था। बिहार से 18 जिलों को अलग कर झारखंड राज्य बना था। इस वर्ष झारखंड अपना 24 वां स्थापना दिवस मना रहा है। इसी दिन झारखंड के भगवान ‘धरती बाबा’ यानी ‘बिरसा मुंडा’ की जयंती भी होती है। बता दें कि 15 नवंबर साल 2000 को बिहार के दक्षिणी हिस्से से छोटानागपुर क्षेत्र को अलग कर झारखंड नाम से एक अलग राज्य बनाया गया था। जिसके साथ झारखंड देश का 28 वां राज्य बना था। उल्लेखनीय है कि झारखंड के आदिवासी बहुत पहले ही एक अलग राज्य की मांग कर रहे थें। क्योंकि आदिवासी समुदाय और लोगों को आजादी के बाद से ही सामाजिक आर्थिक लाभ बहुत कम मिला था। झारखंड दो शब्दों से मिलाकर बनाया गया है-झार और खंड। झार का मतलब होता है जंगल और खंड का मतलब भूमि। यानी कि वन की भूमि। झारखंड का राजकीय पशु हाथी है और राजकीय पक्षी कोयल है।

कैसा है वर्तमान:-

वर्तमान में झारखंड में कुल 24 जिले हैं जिन्हें पांच प्रमंडलों में बांटा गया है। कुल क्षेत्रफल लगभग 79,716 वर्ग किलोमीटर है। क्षेत्रफल के आधार पर यह देश का 15वां बड़ा राज्य है। प्रकृति ने झारखंड को अद्भुत छटाओं से नवाजा है। जिसमें झरने, पहाड़ी, वन्य जीव, अभ्यारण, दामोदर नदी आदि शामिल हैं। यहां के पवित्र स्थानों में बैद्यनाथधाम, पारसनाथ रजरप्पा जैसे पर्यटक स्थल भी है। प्रकृति ने झारखंड को कोयला, तांबा अयस्क, अभ्रक, लौह अयस्क, बॉक्साइट, ग्रेनाइट पत्थर, यूरेनियम, चांदी और डोलोमाइट जैसे खनिज भर भर के दिए हैं।

जिससे यह एक समृद्ध राज्य है। बता दें कि भारत में जितने भी खनिज भंडार हैं, झारखंड में उसका 40 फीसदी हिस्सा पाया जाता है। अपने स्थापना के बाद से राज्य ने विकास के कई कदम आगे बढ़ाया है। खनिज संपदा के दोहन, उद्योगों की स्थापना और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया गया है। राज्य में सड़कें, रेलवे और हवाई अड्डों का जाल बिछाया गया है। वहीं शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सुधार के प्रयास किए गए हैं जो कि निरंतर जारी है।

झारखंड – बिहार के विकास की तुलना:-

बिहार से अलग होने के कारण झारखंड की तुलना बिहार से होती ही है। दोनों ही राज्य भारत के विकासशील राज्यों में आते हैं। दोनों राज्यों के सामने समान चुनौतियां हैं जैसे कि गरीबी, बेरोजगारी, कुपोषण और सामाजिक असमानता। हालांकि, दोनों राज्यों के विकास और वर्तमान स्थिति में काफी अंतर है। जहां झारखंड में कोयला, लोहा, तांबा आदि खनिजों की प्रचुरता है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हालांकि राज्य में अभी भी गरीबी और बेरोजगारी की समस्या बनी हुई है।

वहीं पलायन भी यहां की मुख्य समस्याओं में से एक है। प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में भी काफी सुधार की जरुरत है। आदिवासी जनजातियों के अधिकारों के संरक्षण को लेकर भी चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। हालांकि झारखंड में बिहार की तुलना में खनिज संपदा ज्यादा है। वहीं बिहार की तुलना में औद्योगीकरण भी ज्यादा हुआ है। बिहार की तुलना में यहां का बुनियादी ढांचा बेहतर है। हालांकि, झारखंड में अभी भी कई चुनौतियां शेष हैं जिनका सामना अभी बाकी है। उम्मीद है कि एक दिन हमारा झारखण्ड भी विकास की नयी परिपाटी को छुएगा। जो इसे औरों से अलग बनाएगी। आखिर ये है ‘आमार सोनार झारखण्ड’

“स्थापना दिवस की सभी झारखण्डियों को बधाई”

 

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