लाइव पलामू न्यूज : हेमंत सोरेन सरकार द्वारा प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट राज्य के युवाओं, किसानों, मज़दूरों और ग़रीब वर्ग के साथ अन्याय का दस्तावेज़ साबित हो रहा है। यह बजट झारखंड के विकास की दिशा में कोई ठोस कदम उठाने में विफल रहा है, विशेष रूप से रोज़गार और बुनियादी सुविधाओं की उम्मीद लगाए युवाओं के लिए यह बजट महज़ छलावा बनकर रह गया है।

झारखंड के युवा सरकार से यह उम्मीद कर रहे थे कि उनके रोज़गार की दिशा में ठोस योजनाएं लाई जाएंगी, लेकिन बजट में इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। राज्य में बेरोज़गारी की दर लगातार बढ़ रही है, फिर भी सरकार ने न तो नई नियुक्तियों की घोषणा की और न ही किसी प्रभावी योजना का ज़िक्र किया। सरकारी विभागों में हज़ारों पद रिक्त पड़े हैं, लेकिन उन पर बहाली की कोई योजना इस बजट में नहीं रखी गई। उक्त बातें कहीं भाजपा दिल्ली प्रदेश (पूर्वांचल मोर्चा ) प्रवक्ता देवेश तिवारी ने।
पलामू प्रमंडल के साथ भेदभाव
उन्होंने कहा कि इस बजट में पलामू प्रमंडल के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है। राज्य की प्रमुख परियोजनाओं और विकास योजनाओं का लाभ मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र तक सीमित कर दिया गया, जबकि पलामू प्रमंडल के लिए कोई ठोस योजना नहीं लाई गई। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब राज्य के वित्त मंत्री खुद पलामू क्षेत्र से आते हैं, फिर भी इस प्रमंडल को विकास से वंचित रखा गया है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और किसान कल्याण की अनदेखी
देवेश ने कहा कि झारखंड सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और किसान कल्याण के क्षेत्रों में भी कोई गंभीर पहल नहीं की है। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है, लेकिन बजट में इस दिशा में कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बजट में कोई महत्वपूर्ण वृद्धि नहीं हुई, जिससे आम जनता की परेशानियां और बढ़ेंगी।
किसानों के लिए भी यह बजट निराशाजनक है। झारखंड के किसान पहले से ही कठिनाइयों से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनकी मदद के लिए कोई नई योजना नहीं पेश की। महंगाई और आर्थिक तंगी के दौर में किसानों को राहत देने के बजाय सरकार ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है।
हेमंत सोरेन सरकार का यह बजट झारखंड के युवाओं, किसानों, मज़दूरों और आम जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता। यह बजट विकास के नाम पर केवल आंकड़ों का खेल बनकर रह गया है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यह बजट सरकार की नाकामी और जनविरोधी नीतियों का प्रमाण है, जिससे झारखंड की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।