लाइव पलामू न्यूज/मेदिनीनगर: मंगलवार को मृतक कुंदन पांडे के परिजनों से आइसा, आरवाईए एवं भाकपा माले की जांच टीम ने मुलाकात की। इस दौरान परिजनों से पूछताछ की गई। मृत्यु से जुड़े काग़ज़ात देखे गए। बता दें कि कुंदन पांडे को 5 सितंबर 2024 को अपहरण के मामले गिरफ्तार किया गया था और 11 सितंबर को कुंदन पांडे 6 बजे सुबह सदर अस्पताल में जेल से मृत लाए गए। सदर अस्पताल व एमएमसीएच के इंपेशेंट राशिद(inpatient receipt) में बरोट डेथ (brought death ) दर्शाया गया है।

यानी कि लाया गया रोगी पहले से ही मृत था और , इस रसीद में बीपी नापकर भी लिखा गया है। जब कोई मृत लाया गया तो उसका बीपी कैसा जांच हुआ? पोस्टमार्टम के मृत्यु का कारण क्यों नहीं लिखा? जेल में कोई किसी को कैसे मार सकता है? ऐसे बहुत से सवाल कौंधते है!
जेल प्रशासन और सदर अस्पताल दोनों ही प्रशासन द्वारा मृत्यु की जिम्मेवारी नहीं लेने के कारण, अभी तक मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं निर्गत किया गया है। जिसके वजह से कुंदन पांडे के साथ जप्त किए गए समान जिसमें की एक स्प्लेंडर मोटर बाइक, मोबाइल, गले की सोने की चेन अभी तक छोड़ी नहीं गई है।
कुंदन पांडे का पोस्ट मार्टम करने वाले डॉक्टर्स की टीम में हरी ओम प्रसाद, आर के रंजन और अन्य शामिल थे, जिन्होंने “मृत्यु का कारण” रिपोर्ट में नहीं बताया है। विसरा जांच भी नहीं हुआ है।
मृत्यु उपरांत घरवालों ने मर्डर का केस करना चाहा, जिसमें सदर थाना प्रभारी देवव्रत पोद्दार ने मामला दर्ज नहीं किया।बताते चलें कि कुंदन पांडे मर्चेंट नेवी में काम करते थें। छुट्टियों में वह घर आए हुए थें । जिसमें अपने दोस्त यारों के साथ एक अपहरण के मामले में उनके ऊपर केस हो गया था।
जिसके वजह से उन्हें गिरफ्तार कर जेल ले जाया गया था। जेल जाकर उन्हें बेल तक अप्लाई करने का मौका नहीं मिला और चार दिन के अंदर ही उनकी मृत्यु जेल के चारदिवारी के अंदर हो गई।
ऐसे मृत्यु को जांच टीम संस्थागत हत्या घोषित करती है और प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए जिम्मेवार ठहराती है। जल्द ही इस घटना के ऊपर जांच कर मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत किया जाए एवं मृत के परिवार को मुआवजा दिया जाए। टीम ने यह भी कहा कुंदन पांडे का परिवार मिट्टी के कच्चे मकान में रह रहा है, और बड़ी आर्थिक तंगी में जी रहा है।
जांच टीम में गौतम दांगी, शिला सिंह और दिव्या भगत शामिल थें।