LIVE PALAMU NEWS DESK : पलामू जिले के छतरपुर और हरिहरगंज की सीमा पर नेशनल हाइवे 98 पर स्थित है- सुल्तानी घाटी। जिसे नक्सली आतंक, लूट और दुर्घटनाओं के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन अब इस घाटी की तस्वीर बदली नजर आ रही है। अब यहां न तो नक्सलियों का डर है और न ही लूट का। फिलवक्त सड़क दुर्घटना ही एक चुनौती है जो अभी भी बनी हुई है।

नेशनल हाइवे-98 पर स्थित यह सुल्तानी घाटी झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ को जोड़ती है। छत्तीसगढ़ से सभी वाहन इसी रास्ते बिहार में प्रवेश करते हैं। यह झारखंड के पलामू और बिहार के औरंगाबाद को जोड़ता है। स्थानीय लोगों की माने तो एक दशक पहले तक सुल्तानी घाटी से शाम 5:00 बजे के बाद कोई भी यात्री वाहन नहीं गुजरता था। मालवाहक वाहन भी अंधेरा होने के बाद रुक जाते थें। रात में सभी वाहन एक साथ एक जगह तब तक रुके रहते थे जब तक पुलिस उन्हें एस्कॉर्ट करके पार नहीं करा देती।
यह घाटी कभी नक्सलियों के साथ-साथ अपराध की घटनाओं के लिए भी चर्चित थी। बसों को एक साथ क्लब कर पुलिस एस्कॉर्ट में भेजा जाता था। हालांकि अब हालात बदल चुके हैं, पुलिस बल तैनात हैं। लेकिन दुर्घटनाएं अभी भी चुनौती बनी हुई हैं।
सुल्तानी घाटी में बढ़ रही दुर्घटनाओं रोकने के लिए पुलिस पहल कर रही है।” – रीष्मा रमेशन, एसपी,
पलामू पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2008 से 2018 के बीच इस घाटी में लूट की 17 से ज्यादा घटनाएं वहीं लगभग आधा दर्जन नक्सली घटनाएं भी हुई हैं। 2018 के बाद स्थिति में सुधार आ रहा है।
सुल्तानी घाटी लगभग 2 किलोमीटर के दायरे में है. नेशनलन हाइवे-98 के फोरलेन बनने से पहले, सुल्तानी घाटी एक बेहद तीखे मोड़ वाली चढ़ाई थी। घटनाओं के मद्देनजर पलामू पुलिस सुल्तानी घाटी में पिकेट लगाने की योजना में थी। लेकिन 2019 के बाद, नेशनल हाइवे-98 को फोरलेन बनाने की योजना बनाई गई। जिसके बाद नेशनल हाइवे-98 फोरलेन हो गया और सुल्तानी घाटी की स्थिति में बदलाव आ गया।