मेदिनीनगर: सोमवार को नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय (NPU) का तृतीय दीक्षांत समारोह जीएलए कॉलेज स्टेडियम में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, पलामू सांसद विष्णुदयाल राम, चतरा सांसद कालीचरण सिंह, झारखंड विधानसभा के प्रथम स्पीकर इंदर सिंह नामधारी और विश्वविद्यालय के कुलपति ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

समारोह में विश्वविद्यालय की 62 मेधावी छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल तथा 900 से अधिक छात्रों को उपाधि प्रदान की गई।

क्या कहा राज्यपाल ने : 

राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय की स्थापना को 16 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अब तक मात्र तीन बार दीक्षांत समारोह आयोजित हुए हैं। इससे छात्रों को समय पर डिग्रियां नहीं मिल पाईं। उन्होंने कहा कि अब राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को नियमित कक्षाएं चलाने और समय पर डिग्री प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि गोल्ड मेडल पाने वालों में सबसे अधिक संख्या लड़कियों की है, जो एक विकसित भारत का प्रतीक है। राज्यपाल ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि समाज को साथ लेकर चलना भी है।

वित्त मंत्री ने दी नसीहत : 

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा का मूल भाव सम्मान है। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज में नफरत और वैमनस्य की भावना को मिटाने का काम करती है। उन्होंने छात्रों से राजनीति में भी भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले अधिकारी बनना चाहते हैं, लेकिन कोई नहीं कहता कि वह विधायक या सांसद बनेगा। राजनीति में भी पढ़े-लिखे युवाओं की जरूरत है।

वित्त मंत्री ने चिंता जताई कि पिछले 16 वर्षों में केवल 157 लोगों ने ही पीएचडी के लिए पंजीकरण कराया है। उन्होंने पलामू की सूखाग्रस्त समस्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का भूतत्व विभाग जल संचयन के लिए विशेष पहल करे। साथ ही उन्होंने बताया कि झारखंड में यूनिवर्सिटी कमीशन का गठन किया जाएगा जो शिक्षकों की नियुक्ति करेगा।

समारोह के दौरान यह बातें रही अहम : 

62 मेधावी छात्रों को गोल्ड मेडल, 900 से अधिक छात्रों को डिग्री

लड़कियों की संख्या सर्वाधिक, शिक्षा में बढ़ती भागीदारी का संकेत।

राजनीति में उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं की भागीदारी पर जोर।

पलामू क्षेत्र की सूखा समस्या पर विश्वविद्यालय की भूमिका पर सवाल।

विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2009, अब तक केवल तीन बार हुआ दीक्षांत समारोह।

 

समारोह ने एक ओर जहां छात्रों की उपलब्धियों का सम्मान किया, वहीं दूसरी ओर उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालयों की चुनौतियों पर गंभीर सवाल भी खड़े किए।