लाइव पलामू न्यूज: उद्योगपति रतन टाटा का 86 साल की उम्र में निधन हो गया है। अपनी खराब सेहत के कारण पिछले कई दिनों से वे ब्रीच कैंडी अस्पताल में एडमिट थें। बढ़ती उम्र के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियां थीं। काफी समय से उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ देने की मांग की जा रही थी। रतन टाटा के लिए देशभर के लोगों में असीम सम्मान था। रतन टाटा के निधन की पुष्टि टाटा समूह ने की है।
टाटा समूह ने अपने बयान में कहा कि यह हमारे लिए बहुत बड़ी क्षति है। उन्होंने न सिर्फ टाटा समूह को बल्कि देश को भी आगे बढ़ाया है। हर्ष गोयनका ने रतन टाटा के निधन की जानकारी देते हुए एक्स पर पोस्ट किया। जिसमें उन्होंने लिखा, रतन टाटा ईमानदारी, नैतिक नेतृत्व और परोपकार की मिसाल थें। उन्होंने बिजनेस और उससे अलग दुनिया पर एक अमिट छाप छोड़ी है। वह सदैव हमारी स्मृतियों में बने रहेंगे।
28 सितंबर 1937 को जन्मे रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा समूह ने बुलंदियों को छुआ। 1991 में रतन टाटा टाटा समूह के चेयरमैन बने थे। जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह 2012 तक इस पद पर रहे। उन्होंने 1996 में टाटा सर्विसेज और 2004 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी कंपनियों की स्थापना की। विनम्र व्यवहार के लिए विख्यात रतन टाटा फिलहाल टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन हैं।
जिसमें सर रतन टाटा ट्रस्ट एवं एलाइड ट्रस्ट के साथ ही सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट एवं एलाइड ट्रस्ट भी शामिल हैं। भारत के कारोबारी जगत में उनका काफी अहम योगदान माना जाता है। उन्हें भारत के दो सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण (2008) और पद्म भूषण (2000) से सम्मानित किया जा चुका है। एक अरबपति होने के बावजूद भी उन्हें एक सहृदय, सरल और नेक व्यक्ति के रूप में देखा जाता है।