मेदिनीनगर : पलामू में 15 नवंबर से नवजात शिशु सुरक्षा सप्ताह की शुरुआत हो गई है। इसी को लेकर मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग ने सिविल सर्जन डॉ. अनिल श्रीवास्तव के नेतृत्व में जिले के सभी सीएचसी, पीएचसी और सरकारी अस्पतालों में तैनात एएनएम को प्रशिक्षण दिया।

प्रशिक्षण के दौरान डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि माताओं और गर्भवती महिलाओं को नवजात की सुरक्षा, पोषण और देखभाल के प्रति जागरूक करना अभियान का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि जन्म के बाद छह माह तक केवल स्तनपान कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि मां का दूध नवजात के लिए सबसे पौष्टिक होता है।
उन्होंने बताया कि जिले में शिशु मृत्यु दर अभी भी 18% है, जिसे कम करने के लिए विभाग लगातार अभियान चला रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि सितंबर से दिसंबर के बीच सबसे अधिक बच्चों का जन्म होता है।
0–5 वर्ष के करीब 16% बच्चे निमोनिया से प्रभावित होते हैं:
इस दौरान माता-पिता को नवजात की देखभाल, ठंड से सुरक्षा और बीमारियों से बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है। शुरुआती एक सप्ताह को सबसे संवेदनशील माना जाता है, इसलिए विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।
जानकारी अनुसार हर साल 0–5 वर्ष के करीब 16% बच्चे निमोनिया से प्रभावित होते हैं और समय पर उपचार न मिलने पर यह मृत्यु का बड़ा कारण बन जाता है। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि नवजात और मां को जन्म के तुरंत बाद 25–27 डिग्री तापमान में रखना चाहिए।
कम वजन (2.5 किलो से कम) या प्री-मैच्योर बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए उनके लिए अतिरिक्त देखभाल जरूरी होती है।
अधिक या कम ऑक्सीजन—दोनों ही नवजात के लिए हानिकारक : डॉक्टर गौरव विशाल
वही डॉक्टर गौरव विशाल ने बताया कि पलामू में फिलहाल केवल एक ही SNCU संचालित है। उन्होंने कहा कि जन्म के बाद बच्चे को साफ तौलिया से पोछें, गीले कपड़े दूर रखें और स्किन-टू-स्किन कांटेक्ट बनाए रखना फायदेमंद है। साथ ही अधिक या कम ऑक्सीजन—दोनों ही नवजात के लिए हानिकारक होती हैं।
नवजात देखभाल के अहम निर्देश
जन्म के तुरंत बाद बच्चे का रोना जरूरी, देर से रोने पर ब्रेन इंजरी का खतरा बन जाता है।
नवजात को मां के पेट पर रखकर गर्माहट देना चाहिए, अलग नहीं करना चाहिए।
सिकिलसेल, थैलेसीमिया सहित अन्य मेटाबॉलिक स्क्रीनिंग कराना आवश्यक।
तीन जरूरी वैक्सीन—जीरो डोज हेपेटाइटिस B, OPV और शुरुआती टीके 15 दिनों के भीतर देना जरूरी होता है।
स्तनपान के फायदे बताते हुए बताया कि मां को ब्लीडिंग नहीं होती, अगली प्रेग्नेंसी में दिक्कत नहीं, वजन नहीं बढ़ता और बच्चा कई बीमारियों से सुरक्षित रहता है। जन्म के बाद नवजात पर नारियल तेल लगाया जा सकता है।