LIVE PALAMU NEWS DESK : जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार द्वारा दायर अपीलों के एक समूह को खारिज करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण में क्रीमी लेयर के निर्धारण में माता-पिता के पद और उनके सामाजिक – प्रशासनिक दर्जे को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

अदालत ने केंद्र सरकार की अपीलों को खारिज करते हुए कई UPSC उम्मीदवारों को राहत दी, जिन्हें गलत तरीके से OBC क्रीमी लेयर मानकर नियुक्ति से रोका गया था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने 11 मार्च को दिए आदेश में कहा कि किसी उम्मीदवार को OBC की क्रीमी लेयर या नॉन-क्रीमी लेयर में रखा जाएगा या नहीं, यह केवल उसकी आय के आधार पर तय नहीं किया जा सकता।

बेंच ने कहा कि अधिकारियों ने उन्हें नॉन-क्रीमी लेयर से बाहर करने के लिए आय/संपत्ति आधारित परीक्षण का गलत इस्तेमाल किया, जबकि यह तय करने के लिए कि उम्मीदवार OBC क्रीमी लेयर में आता है या नहीं, निर्धारित स्थिति-आधारित मानदंड लागू किया जाना चाहिए था।

बताते चलें कि, ‘क्रीमी लेयर’ उन ओबीसी लोगों को कहा जाता है जो आर्थिक और सामाजिक रूप से काफी आगे बढ़ चुके हैं। ऐसे लोगों को ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिलता।

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