गढ़वा : उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी दिनेश यादव ने शनिवार को मेराल प्रखंड का क्षेत्र भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने मेराल प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय, पढूवा पंचायत भवन, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, आंगनबाड़ी केंद्रों तथा विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया।

इस दौरान उपायुक्त ने पढूवा पंचायत भवन में ग्रामीणों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं एवं योजनाओं की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि “सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

15वें वित्त की योजना में अनियमितता पर नाराजगी जताते हुए  कोऑर्डिनेटर एवं जेई से मांगा स्पष्टीकरण

निरीक्षण के दौरान 15वें वित्त आयोग की योजनाओं के कार्य में लापरवाही एवं असंतोषजनक स्थिति पाई गई। उपायुक्त ने पाया कि योजना स्थल पर कार्य की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं है तथा प्रखंड समन्वयक एवं कनिष्ठ अभियंता सही जानकारी देने में असमर्थ रहे।

इस पर उपायुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए दोनों को फटकार लगाई तथा मेराल प्रखंड के 15वें वित्त के कोऑर्डिनेटर रश्मि लकड़ा एवं कनिय अभियंता आनंद कृष्ण से स्पष्टीकरण मांगा। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि स्पष्टीकरण के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति पर असंतोष

आंगनबाड़ी केंद्र पढ़ूआ के निरीक्षण के दौरान सेविका एवं सहायिका उपस्थित पाई गईं, किंतु मात्र 5 बच्चे उपस्थित थे। इससे यह स्पष्ट हुआ कि केंद्र नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहा है। पूछताछ के दौरान सेविका शर्मीला देवी संतोषजनक उत्तर नहीं दे सकीं।

केंद्र की स्थिति देखकर उपायुक्त ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा एवं पोषण का आधार हैं, इनकी अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने सेविका शर्मीला देवी एवं सहायिका विमली देवी से स्पष्टीकरण मांगा है।

विद्यालयों का निरीक्षण: सहबरिया विद्यालय में संतोषजनक व्यवस्था

निरीक्षण के क्रम में उत्क्रमित मध्य विद्यालय सहबरिया में पठन-पाठन की स्थिति संतोषजनक पाई गई। छात्रों की उपस्थिति अच्छी थी, मध्यान्ह भोजन मेनू के अनुसार खिचड़ी तैयार हो रही थी, सभी छात्र यूनिफॉर्म में तथा सभी शिक्षक उपस्थित थे।

वहीं, राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय पदूंवा में जांच के दौरान सभी शिक्षक तो उपस्थित पाए गए, किंतु विद्यालय प्रबंधन समिति एवं ग्रामीणों ने बताया कि जो शिक्षक गढ़वा से आते हैं, वे पूरे दिन विद्यालय में रहते हैं, जबकि स्थानीय पारा शिक्षक केवल उपस्थिति दर्ज कर अपने निजी कार्यों में चले जाते हैं और शाम में पुनः विद्यालय में आकर उपस्थिति दर्ज करते हैं।

उपायुक्त ने इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को इसकी सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

मनरेगा की मेड़बंदी योजना का किया स्थलीय निरीक्षण

क्षेत्र भ्रमण के दौरान उपायुक्त ने मनरेगा के तहत चल रही मेड़बंदी योजना का भी स्थलीय निरीक्षण किया।
वे धान से भरे खेतों के बीच पगडंडी पर पैदल चलकर कार्य स्थल तक पहुंचे और वहां किए जा रहे कार्य की गुणवत्ता की बारीकी से जांच की।

उन्होंने कार्यरत मजदूरों से भी बातचीत की और समय पर मजदूरी भुगतान एवं कार्य की निगरानी से संबंधित जानकारी प्राप्त की।

उपायुक्त ने उपस्थित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि “मनरेगा योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सर्वोपरि है, किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने कहा कि जिले में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसेवाओं में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सर्वोपरि है। किसी भी स्तर पर उदासीनता या लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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