एक साल हो गए जलमीनार लगे, अभी तक चालू नहीं! सोलर पैनल और घर तक पाइपलाइन नहीं बिछी, बिजली और सदर अस्पताल में महिला प्रसूति में होती है दिक्कत – स्थानीय महिलाएं
मेदिनीनगर : हाउसिंग कॉलोनी से सटे छोटकी बैरिया, वार्ड नंबर 3 की दलित बस्ती शहर में होकर भी ग्रामीण क्षेत्र जैसा दिखाई पड़ता है, यहां के लोग रोजी रोजगार, मजदूरी करने वाले है, दलित है, शायद इसलिए नगर निगम इन्हें शहर का नागरिक नहीं मानती। यहां के लोग पानी की असुविधा से बहुत परेशान है। भाकपा माले की नगर निगम प्रभारी दिव्या भगत ने बस्ती में बैठक की।

नल जल योजना को बस्ती में आए 1 साल हो चुका है। एक साल में रह – रह कभी मोटर लगता है, कभी टंकी लगता है, लेकिन अभी पानी नहीं आया।जल प्रणाली को चालु करने हुए सोलर पैनल नहीं लगा। घर-घर नल देने हेतु पाइपलाइन नहीं बिछाया गया, यहां तक की बगल के बस्ती के आवंटित जल मीनार को टी ओ पी 3 लेकर चले गए है। महिलाओं को दूर दूर जा कर बाल्टियों की लाइन लगा कर पानी लेकर आना पड़ता।
गर्मी के दिन भीषण होते जा रहे है, पर नगर निगम द्वारा एक भी दिन यहां टैंकर नहीं भेजा गया
महिलाओं की मांग है, की घर का काम के साथ पानी लाना उनके लिए अतिरिक्त बोझ हो जाता है, पानी की कमी से बच्चे नहा नहीं रहे, घर के काम नहीं हो रहे। बाहर जाने वाली कामकाजी महिलाओं को और दिक्कत है। जल्द से जल्द छोटकी बैरिया में पाइपलाइन के साथ जल मीनार को जल्द से जल्द चालू किया जाए, और तब तक टैंकर द्वारा पानी की आपूर्ति की जाए।
अपनी बातों में स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि बिजली का स्मार्ट मीटर उनके यहां जबरजस्ती लगाया गया है। उनको पहले जैसा ही मीटर फिर से उपलब्ध हो। मौके पर दिव्या भगत ने कहा कि स्मार्ट मीटर गैरसरकारी कंपनियों द्वारा लगाया जा रहा है, जिसमें रिचार्ज कर बिजली का उपयोग कर सकते है, गरीब लोग बिजली कम इस्तेमाल करते है, 200 यूनिट बिजली माफ है, जब गरीबों का बिल ही ज्यादा नहीं होता, माफ हो ही जायेगा तो स्मार्ट मीटर की क्या जरूरत? स्मार्ट मीटर कॉरपोरेट के द्वारा गरीबों से जबरजस्ती ज्यादा बिल लेने की साजिश है।
आज के दिन में डाल्टनगंज शहर का विस्तार तेजी हो रहा है। तब शहर के बिल्कुल मध्य में ऐसी बस्ती जहां मूलभूत सुविधाएं नहीं, इस बात की ओर इंगित करता है कि दलितों को शहर का नागरिक और उनकी बस्तियों को नगर निगम का हिस्सा नहीं माना जाता।
महिलाओं यह भी कहा कि हम गरीब है, बड़े बड़े निजी अस्पतालों का खर्चा नहीं दे सकते, हमें प्रसूति के लिए सदर में रात में जाने पर कभी ऑपरेशन के लिए डॉक्टर नहीं मिलते, मजबूरी में उनको निजी अस्पताल जाना पड़ता है। सदर अस्पताल में महिलाओं के लिए अभिलंब रात्रि को भी प्रसूति ऑपरेशन के लिए डॉक्टर नियुक्त हो। महापौर एक महिला होकर भी महिलाओं को इतनी दिक्कत होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
मौके पर आर वाई ए के रौशन कुमार, इतवारिया देवी, पूनम देवी, संपति देवी, कौशल्या देवी, सरिता देवी, रेखा देवी, मंजू देवी एवं अन्य शामिल थे।