लाइव पलामू न्यूज: नवरात्र के छठे दिन देवी दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। ऋषि कात्यायन के यहां जन्म लेने के कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। माता कात्यायनी की उपासना से व्यक्ति को किसी प्रकार का भय या डर नहीं रहता है। साथ ही उसे किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना भी नहीं करना पड़ता है। जिन लोगों की शादी में दिक्कतें आ रही है उन्हें मां कात्यायनी की पूजा जरूर करें। माता की आराधना करने से मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति शीघ्र होती है।
माता का स्वरूप:-
माता कात्यायनी का रंग सोने के समान चमकीला है। इनकी चार भुजाएं हैं। उनका दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में रहता है। और उसके नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मां के बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार है और नीचे वाले हाथ में कमल का फूल विर्जमान हैं। माता कात्यायनी की सवारी सिंह है। इनकी पूजा करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भोग:-
माता कात्यायनी को पीला रंग अधिक प्रिय है। इसलिए उन्हें पीले रंग की मिठाइयों का भोग लगाना चाहिए। उन्हें शहद अति प्रिय है। माता को शहद या शहद से बनी खीर और शहद वाले हलवे का भोग जरूर लगाएं। इसके अलावा मां कात्यायनी को गुड़ भी अर्पित कर सकते हैं।
ध्यान मंत्र:-
चन्द्रहासोज्जवलकराशार्दुलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।