डा. विनोद कुमार तिवारी के लेखन ने बढ़ाया है पलामू का मान :- इंदर सिंह नामधारी
साहित्य की अनमोल निधि है संस्कृति त्रयी: अरूणा शंकर
मेदिनीनगर : मेदिनीनगर स्थित नीलांबर-पीतांबर सम्मेलन कक्ष में डा.विनोद कुमार तिवारी द्वारा लिखित संस्कृति ट्रायलोजी रामायण कथा की विश्वयात्रा,हमारी सांस्कृतिक राष्ट्रीयता व पूर्वजों की पुण्य-भूमि का भव्य लोकार्पण हुआ। लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता राजनीतिक विचारक श्री श्याम नारायण दूबे ने किया जबकि संचालन रामदीन शोध संस्थान के संयोजक व सेना में धर्मगुरु डा.सत्यकेतु संजय ने किया।

विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित प्रथम मेयर अरूणा शंकर,नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय, सीसीडीसी मनोरमा सिंह,अधिवक्ता बलराम तिवारी,कवि हरिवंश प्रभात,श्रीधर प्रसाद द्विवेदी,रविशंकर पाण्डेय,परशुराम तिवारी,डा.अवधेश पाण्डेय,अमित तिवारी,अंगद किशोर, अवकाश प्राप्त कमांडेंट अवधेश पाण्डेय,प्रभात मिश्र सुमन,राणा अरुण सिंह,रतन कुमार पाण्डेय, सुरेन्द्र तिवारी व पंकज श्रीवास्तव सहित अनेक विद्वत जनों ने संयुक्त रूप से पुस्तकों का लोकार्पण किया।
मुख्य अतिथि झारखंड के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष श्री इंदर सिंह नामधारी ने दूरभाष पर लेखक डॉ विनोद कुमार तिवारी को बधाई देते हुए कहा कि संस्कृति त्रयी ने पलामू के मान व शान को बढ़ाया है। इन पुस्तकों को अवश्य पढ़ा जाना चाहिए।
वहीं प्रथम मेयर अरूणा शंकर ने कहा कि ये पुस्तक हमें जड़ों से जुड़े रहने के साथ अपनी संस्कृति पर गर्व करना सिखाती हैं।अब यह पुस्तक साहित्य की अनमोल निधि है।
डीएसडब्ल्यू सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कहा तीनों पुस्तकें लेखक के गहन अध्ययन व शोध के कौशल को दर्शाती हैं। साथ ही ये राम कथा के वैश्विक फलक व सांस्कृतिक विरासत के महत्त्व को भी रेखांकित करती हैं। अधिवक्ता बलराम तिवारी ने सांस्कृतिक राष्ट्रीयता की सोच व लेखन पर प्रकाश डाला।
ये रहे उपस्थित :
इस मौके पर रघुवंशमणि पाण्डेय, प्रभात रंजन पाण्डेय,नितिन पाण्डेय,सुरेन्द्र पाण्डेय,सत्यनारायण पाण्डेय,सत्यवान पाण्डेय,शीला श्रीवास्तव,श्रीकांत पाण्डेय,सुनील कुमार सिंह, बैजन्ती गुप्ता,राकेश झा,बालकेश तिवारी,आशुतोष पाण्डेय,कौशल किशोर ओझा,मानस मिश्रा,अजय पाण्डेय, विजय ठाकुर,वीणा राज,उदय नारायण शुक्ला, सुधांशु पाण्डेय,अजय तिवारी,कांति देवी,रेणु कुमारी,सिंधु तिवारी,मनीष भिवानिया व सुशील कुमार पाण्डेय सहित काफी संख्या में साहित्यकार व साहित्य प्रेमी मौजूद थे।