LIVE PALAMU NEWS DESK : सावन माह में आने वाली अमावस्या को श्रावणी/हरियाली अमावस्या कहा जाता है। हरियाली अमावस्या पर भी पितरों की शांति के लिए पिंडदान और दान-धर्म करने का महत्व है। इस बार हरियाली अमावस्या 24 जुलाई यानी आज मनाई जा रही है। वहीं, अमावस्या तिथि का समापन 25 जुलाई (अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब अनुसार) को देर रात 12 बजकर 40 मिनट पर होगा।

सावन का महीना देवों के देव महादेव को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर भोले भंडारी की पूजा की जाती है। साथ ही पितरों की आत्मा की शांति हेतु तर्पण एवं पिंडदान किया जाता है। धार्मिक मत है कि अमावस्या तिथि पर भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के मानसिक एवं शारीरिक व्याधि से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन में सुख और शांति का आगमन होता है। वहीं, पितरों की कृपा भी व्यक्ति विशेष पर बरसती है।

इस बार हरियाली अमावस्या बहुत ही खास है क्योंकि आज गुरु पुष्य योग, सर्वार्थसिद्धि योग और अमृतसिद्धि योग का निर्माण होने जा रहा है। इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं और सुख-शांति की कामना करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और पति को लंबी उम्र का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कथा :

एक समय की बात है, राजा महल में अपने परिवार के साथ सुखपूर्वक निवास किया करता था। एक दिन राजा की पुत्रवधू ने रसोई में मिठाई रखी हुई देखी तो वह सारी मिठाई खा गई। पूछे जाने पर उसने बताया कि सारी मिठाई चूहे खा गए। पुत्रवधू की यह बात चूहों ने सुन ली और वे गलत आरोप को सुनकर अत्यंत क्रोधित हुए। इसके बाद उन्होंने राजा की बहू को सबक सिखाने का निश्चय किया।

कुछ दिनों के बाद महल में कुछ मेहमान आए, चूहों ने सोचा कि यह अच्छा मौका है, राजा की पुत्रवधू को सबक सिखाने का।बदला लेने के लिए, चूहों ने बहू की साड़ी चुराई और उसे जाकर अतिथि के कमरे में रख दी। जब सुबह सेवकों और अन्य लोगों ने उस साड़ी को वहां देखा, तो लोग राजा की बहू के चरित्र के बारे में बात करने लगे।

यह बात जंगल में आग की तरह पूरे गांव में फैल गई। जब यह बात राजा के कानों तक पहुंची तो उसने अपनी पुत्रवधू के चरित्र पर शक करते हुए, उसे महल से निकाल दिया। राजा की बहू महल से निकलकर एक झोपड़ी में रहने लगी और नियमित रूप से पीपल के नीचे दीपक जलाने लगी। इसके साथ ही वह पूजा करके, गुड़धानी का भोग लगाकर, लोगों में प्रसाद बांटने लगी।

इस प्रकार कुछ दिन बीत जाने के बाद, एक दिन राजा उस पीपल के पेड़ के पास से गुज़रे, जहां उनकी बहू हमेशा दीपक जलाया करती थी। इस दौरान उनका ध्यान उस पेड़ के आस-पास जगमगाती रोशनी पर गया। राजा इसे देखकर चकित रह गए। महल में वापस आने के बाद उन्होंने अपने सैनिकों से उस रोशनी के रहस्य का पता लगाने के लिए कहा।

वहां जाने के बाद उन्होंने देखा कि दीपक आपस में बात कर रहे थे। सभी दीपक अपनी-अपनी कहानी बता रहे थे, तभी एक दीपक बोला, मैं राजा के महल से हूं। महल से निकाले जाने के बाद, राजा की पुत्रवधू रोज मेरी पूजा करती है और मुझे प्रज्वलित करती है।सभी अन्य दीपकों ने उससे पूछा कि राजा की बहू को महल से क्यों निकाला गया, तो उसने बताया कि, एक दिन उसने मिठाई खाकर चूहों का झूठा नाम लगा दिया।

इस पर चूहे नाराज हो गए और राजा की बहू से बदला लेने के लिए उसकी साड़ी अतिथि के कमरे में रख आए। यह सब देखकर राजा ने उन्हें महल से निकाल दिया। यह सुनकर सैनिक भी हैरान रह गए और महल वापिस आकर उन्होंने राजा को पूरी कहानी सुनाई। जिसके बाद राजा ने अपनी पुत्रवधु को वापस महल बुला लिया।

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