मेदिनीनगर : वरदान चैरिटेबल ट्रस्ट की सचिव सह स्वतंत्रता सेनानी की परिजन शर्मिला वर्मा ने नावाटोली स्थित तालाब की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह तालाब अपनी बदनसीबी पर आंसू बहाता दिखता है ।इसके आसपास बसे लोग फलते फूलते नजर आते हैं लेकिन यह तालाब और इसमें खड़ी पलामू के दो वीर सपूतों की यह प्रतिमा अपने भाग्य पर आंसू बहाते प्रतीत होते हैं।

नीलाम्बर-पीताम्बर भाईयों की कुर्बानी हमसब धीरे धीरे भूलने लगे हैं ,कम से कम उनकी प्रतिमा को ही बचा लेते । झारखंड अपना रजत जयंति मनाने की पुरजोर तैयारी में लगा है लेकिन इन वीर सपूतों की सुध लेने का समय किसी के पास नहीं। लगातार घोर अतिक्रमण का शिकार यह तालाब सिकुड़ता जा रहा है , जबकि यह जलस्रोत इस इलाके के पानी के लेयर को बरकरार रखने में वरदान साबित होता है ।
शासन, प्रशासन, निगम चुनाव के प्रत्याशी कोई तो आगे आकर पहल करें इन्हें बचाने की। सड़ांध से भरे बजबजाते तालाब में खड़ी इस प्रतिमा की आत्मा जरूर रो रही होगी कि क्या इसीदिन के लिए हमने लड़ाई लड़ी थी।आजादी के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वालों के लिए किसी के पास कोई फंड, कोई सोच, कोई योजना नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर कुछ नहीं है तो कम से कम इसे गिरा ही दीजिए। शहर में जितनी भी महान विभूतियों की प्रतिमाएं लगी हैं ,सभी उपेक्षित हैं। नौ मन धूल से पटी हुई हैं सारी प्रतिमाएं। इनकी साफ-सफाई की जरूरत कोई नहीं समझता।सिर्फ जन्मदिन और पुण्यतिथि पर कुछ संगठनों द्वारा साफ-सफाई कर माल्यार्पण कर दिया जाता है बस । आखिर पलामू में कबतक उपेक्षित रहेंगें हमारे वीर सेनानी ??