लाइव पलामू न्यूज : नवरात्र के आठवें दिन माता के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। माना जाता है कि महागौरी अपने भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करती हैं। माता की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से भक्तों को शांति, समृद्धि और मानसिक शुद्धता की प्राप्ति होती है। अष्टमी के दिन कई लोग हवन के साथ ही कन्या पूजन भी करते हैं।

कथा:-

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मा पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए लगभग 12 हजार वर्ष तक कठोर तपस्या की थी। इस दौरान माता ने केवल बेलपत्र ही भोजन के रूप में ग्रहण किया। उनकी घोर तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए। लेकिन दीर्घकालीन तपस्या के कारण माता का तेज क्षीण हो गया था।

भगवान शिव ने अपनी शक्ति से माता को दिव्य कांति प्रदान की, जिससे उनका सौंदर्य अद्भुत हो गया। इस दिव्य स्वरूप को ही महागौरी के नाम से जाना जाता है। इसी कारण मां महागौरी को सौंदर्य की देवी के रूप में पूजा जाने लगा।

मान्यता है कि मां महागौरी की आराधना करने से न केवल सौंदर्य की प्राप्ति होती है, बल्कि व्यक्ति के आंतरिक दोष भी समाप्त हो जाते हैं, और उसके जीवन में शांति व सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है।

मां का स्वरुप :-

माता का रंग अत्यंत गोरा है। इनकी चार भुजाएं हैं। मां बैल की सवारी करती हैं। महागौरी श्वेत वस्त्र धारण करती हैं। माता को ‘श्वेतांबरधरा’ भी कहा जाता है। मां के एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे में डमरू, तीसरे हाथ अभय मुद्रा और चौथे हाथ वरमुद्रा में हैं।

ध्यान मंत्र : –

श्वेते वृषेसमारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

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