लातेहार : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लाभ से अब भी लातेहार जिले के कई आदिवासी बहुल गांव के लोग
वंचित हैं। हालांकि मामले की जानकारी सामने आने पर आईटीडीए निदेशक ने कहा कि जल्द ही मामले का समाधान किया जाएगा।

269 गांवों में 50% से अधिक आदिवासी परिवारों की संख्या : 

दरअसल, केंद्र सरकार की धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत वैसे गांव जहां आदिवासी परिवार की संख्या 50% से अधिक हो उन गांव में प्रशासन द्वारा विशेष रूप से कैंप लगाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने बकायदा इसके लिए गांव का सर्वे भी करवाया था।’लाइव पलामू न्यूज’ सरकार ने आईटीडीए लातेहार को 269 ऐसे गांव की सूची उपलब्ध कराई , जहां आदिवासी परिवार की संख्या 50% से अधिक हो।

त्रुटिपूर्ण सर्वे की वजह से कैंप से वंचित हैं लोग: 

सूची के अनुसार लातेहार जिला प्रशासन द्वारा कैंप लगाकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है, लेकिन सरकार द्वारा जो सूची विभाग को उपलब्ध कराई गई है, उस सूची में कई ऐसे गांव शामिल नहीं है’लाइव पलामू न्यूज’ जहां आदिवासी परिवारों की संख्या 80% से अधिक है। जबकि सूची में कुछ ऐसे गांव हैं, जहां आदिवासी परिवारों की संख्या काफी कम है। इस त्रुटि पूर्ण सर्वे के कारण आदिवासी बहुल गांव के लोग गांव में लगने वाले कैंप की सुविधा से वंचित हैं।

शिविर लगाने से मिलेगी सुविधाएं : 

इस संबंध में जारम गांव निवासी लोगों का कहना है कि उनके गांव में सिर्फ आदिवासी परिवार के लोग ही रहते हैं। यदि यहां शिविर लगाया जाए तो लोगों को ‘लाइव पलामू न्यूज’ काफी सुविधा मिलेगी। इस संबंध में लातेहार जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव ने नाराजगी जताते हुए कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 50% से अधिक आदिवासी परिवार वाले गांव में शिविर लगाकर लोगों की प्रत्येक समस्या का समाधान कर उन्हें योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।

लेकिन इस सूची में कई ऐसे गांव के नाम छूट गए हैं। जहां आदिवासी परिवारों की संख्या 90% से अधिक है। उन्होंने कहा कि सदर प्रखंड के पेशरार पंचायत का गिरे गांव, डेमू पंचायत का रहिया गांव, इचाक पंचायत का लावागड़ा गांव, पोचरा पंचायत का माराबार ‘लाइव पलामू न्यूज’ और जारम गांव, आरगुंडी का कोल्हेरूआ ,बभनहरुवा आदि कई ऐसे गांव हैं जहां आदिवासी परिवार की संख्या 80% से अधिक है।

वहीं माराबार, जारम आदि गांव में तो 99% से अधिक परिवार आदिवासी समुदाय के हैं। बावजूद इसके शिविर के लिए चयनित सूची में इन गांवों के नाम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस बिंदु पर गंभीरता पूर्वक विचार करने की जरूरत है, ताकि ग्रामीणों को योजना का ‘लाइव पलामू न्यूज’ लाभ मिल पाए। वहीं इस मामले में आईटीडीए निदेशक प्रवीण कुमार गगरई ने कहा कि विभाग को यह सूची सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई है। इस मामले पर जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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