गढ़वा : बुधवार को सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार के नियमित कार्यक्रम “कॉफी विद एसडीएम” के अंतर्गत  ड्रगिस्ट एवं केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों और स्थानीय दवा व्यापारियों के साथ संवाद का आयोजन किया गया। बैठक में व्यापारियों ने अपने व्यवसाय से जुड़ी समस्याएँ, सुझाव और जनहित के मुद्दे विस्तार से रखे।

इस दौरान दवा व्यापारियों ने कहा कि वे जीवन-रक्षा से जुड़े व्यवसाय से जुड़े हैं, किंतु कई बार औषधि विभाग की अनावश्यक जांच, नयी नयी गैर लाइसेंसी दुकानें खुलना और चिकित्सकों की अस्पष्ट लिखावट जैसी कई परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि डॉक्टरों को प्रिंटेड या स्पष्ट अक्षरों (Capital Letters) में दवा लिखने का निर्देश जारी किया जाए, ताकि मरीजों और विक्रेताओं दोनों को सुविधा हो।

 

वहीं कई व्यापारियों ने आरोप लगाया कि औषधि विभाग के कुछ अधिकारी निरीक्षण के दौरान अनुचित दबाव डालते हैं, जिससे सम्मानजनक व्यापारिक माहौल प्रभावित होता है।
गैर-मानक दवाओं की बिक्री और डिस्काउंट के नाम पर भ्रामक विज्ञापन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठी।

 

इस दौरान रघुवीर प्रसाद कश्यप ने कहा कि कई बार दूरदराज़ क्षेत्रों में जीवनरक्षक परिस्थिति में बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा देनी पड़ती है। ऐसे दुर्लभ मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ दुकानों द्वारा मनमाना डिस्काउंट देकर कम गुणवत्ता की दवाएँ बेची जाती हैं, जिससे न केवल मरीजों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है बल्कि ईमानदार व्यापारियों की साख पर भी असर पड़ता है।

सुरेन्द्र कश्यप ने कहा कि जनऔषधि केंद्रों में सिर्फ़ जेनेरिक दवाएँ रखी जानी चाहिए, किंतु सरकारी अस्पताल स्थित केंद्रों में ब्रांडेड दवाओं की बिक्री की जा रही है।

मौके पर उपस्थित औषधि निरीक्षक कैलाश मुंडा ने दवा नियंत्रण से संबंधित विधिक प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने देशभर में चर्चा में रहे कफ सिरप विक्रय नियमों में हाल में हुए बदलावों की जानकारी देते हुए बताया कि औषधि विभाग पर लगाए गए शोषण के आरोप सही नहीं हैं; विभाग केवल अपने दायित्व का निर्वहन कर रहा है।

अंत में एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि प्रशासन दवा व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों द्वारा स्पष्ट लिखावट में दवा लिखने, स्थानीय औषधि विभाग की पारदर्शिता बढ़ाने और गैर-मानक दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने के प्रयास किये जाएंगे।

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