लाइव पलामू न्यूज़: रविवार को श्रीलंका के चुनाव आयोग ने एक पूर्व मार्क्सवादी राजनेता अनुरा कुमार दिसानायके को देश का नया निर्वाचित राष्ट्रपति घोषित कर दिया। शनिवार को हुए चुनाव में 55 वर्षीय पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट के नेता अनुरा कुमारा दिसानायके ने 42.31 प्रतिशत वोट के साथ राष्ट्रपति पद जीता। वहीं विपक्षी नेता सजीथ प्रेमदासा 32.76 प्रतिशत मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। इसके साथ ही पड़ोसी देश में सत्ता दक्षिणपंथ से वामपंथ की ओर, अभिजात वर्ग से श्रमिक वर्ग की ओर स्थानांतरित हुई है।

बताते चलें कि निवर्तमान राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे – जिन्होंने 2022 के आर्थिक पतन के चरम पर पदभार संभाला था और आईएमएफ बेलआउट की शर्तों के अनुसार कठोर मितव्ययिता नीतियां लागू की थीं – 17.27 प्रतिशत मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। हालांकि विक्रमसिंघे ने अभी तक हार नहीं मानी है। लेकिन विदेश मंत्री अली साबरी ने कहा कि यह स्पष्ट है कि दिसानायका जीत गए हैं। साबरी ने सोशल मीडिया पर कहा, “हालांकि मैंने राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के लिए भारी प्रचार किया, लेकिन श्रीलंका के लोगों ने अपना फैसला कर लिया है और मैं अनुरा कुमारा दिसानायका के लिए उनके जनादेश का पूरा सम्मान करता हूं।”

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि दिसानायका सोमवार सुबह कोलंबो स्थित औपनिवेशिक युग के राष्ट्रपति सचिवालय में शपथ ग्रहण करेंगे।

कौन है अनुरा कुमारा दिसानायके:-

1990 के दशक में द्वीप पर साम्यवाद के विचार को आगे बढ़ाते हुए अनुरा एक छात्र नेता के रूप में उभरे। तब तक, जेवीपी के करिश्माई मार्क्सवादी नेता रोहाना विजेवीरा की मृत्यु हो चुकी थी। कभी जेवीपी सबसे अधिक भयभीत और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हुआ करता था। जो सत्ता के लिए लोकतांत्रिक तरीके आजमाने का वादा करते हुए मुख्यधारा की राजनीति में लौट आया था। अनुरा को पहला ब्रेक वर्ष 2000 में मिला जब उन्होंने एक संसदीय सीट जीती। कुछ साल बाद, उन्हें राष्ट्रपति चंद्रिका भंडारनायके कुमारतुंगा सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। जिसके एक साल बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हाल ही में वे संसद में विपक्ष के मुख्य सचेतक थे। पिछले 24 वर्षों में संसद में प्रवेश करने के बाद से वे केवल दो पदों पर रहे हैं।

उनकी पार्टी जेवीपी के पास संसद में केवल तीन सांसद हैं और अगले दो-तीन महीनों में संसदीय चुनावों में जाने से पहले सरकार चलाना उनके लिए काफी मुश्किल होगा। संभावना है कि तीन सांसदों में से एक, प्रोफेसर हरिनी अमरसूर्या फिलहाल प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है।

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