मेदिनीनगर : दो से आठ अक्टूबर तक चलनेवाली वन्यजीव सप्ताह के मौके पर पलामू टाइगर रिज़र्व में बाघ संरक्षण को लेकर दो दिवसीय विशेष बाइक रैली आयोजित की गई। Rally for Tiger – Save the Stripes नाम से हुई। इस रैली में झारखंड के विभिन्न जिलों से आए बाइकर्स क्लबों के सदस्य, स्थानीय युवा, वनकर्मी और ग्रामीण समुदाय के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।

रैली की शुरुआत रांची से हुई। बाइकर्स ने पूरे मार्ग में “Save Tiger, Save Forest, Save Future” के नारे लगाए और लोगों को बाघ एवं जंगल की रक्षा का संदेश दिया। रैली का मकसद न केवल बाघ संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा था, बल्कि इको-टूरिज़्म को बढ़ावा देना और पलामू को फिर से ‘टाइगर कंट्री’ के रूप में पहचान दिलाना भी रहा।
इस अवसर पर पलामू टाइगर रिज़र्व के उपनिदेशक प्रजेश जेना (IFS) ने कहा की भारत के कई टाइगर रिज़र्वों में से पलामू देश का नौवां और झारखंड का एकमात्र टाइगर रिज़र्व है। जब हम बाघ को बचाते हैं, तो हम पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को बचाते हैं। पलामू की पहचान जंगल, संस्कृति और समुदाय से जुड़ी है। इस रैली के जरिए युवाओं में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और जनसहभागिता बढ़ाना ही हमारा लक्ष्य है।
संस्कृति और प्रकृति का संगम बाइकर्स ने रांची से पलामू तक की यात्रा में बेतला नेशनल पार्क, कैचकी संगम, पलामू किला, कमलदाह झील और बक्सा मोड़ स्थित मड हाउस जैसे पर्यटक स्थलों को पार करते हुए गारू रेंज में आयोजित प्राणी संरक्षण एवं वनदेवी पूजा महोत्सव में भाग लिया। इस कार्यक्रम ने स्थानीय समुदाय और पर्यटकों को वन्यजीव संरक्षण की सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ा।

इसके बाद बाइकर्स की टीम मिर्चिया फॉल, सुगा बंध, महुआडांड वुल्फ सेंचुरी, लोध फॉल और नेतरहाट की ओर बढ़ी और प्रकृति, पर्यटन व संरक्षण के बीच संतुलन का संदेश दिया।स्थानीय सहभागिता और संकल्प रैली में वन विभाग की टीम, बेतला ईको-डेवलपमेंट कमिटी और स्थानीय युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प लिया कि वे आगे भी बाघ और उसके आवास की रक्षा के लिए समाज में जागरूकता फैलाते रहेंगे। यह रैली न सिर्फ एक जागरूकता अभियान बनी बल्कि पलामू की जनता के लिए यह गूंजता संदेश छोड़ गई कि अगर जंगल बचेगा, तो जीवन बचेगा।