LIVE PALAMU NEWS DESK : RBI ने मिस सेलिंग और डार्क पैटर्न को लेकर नए नियम पेश किए हैं,जो कि 1 जुलाई से लागू हो जाएंगे। जिसके बाद बैंक बिना आपकी सहमति के एक क्लिक में बीमा पॉलिसी नहीं बेच पाएंगे। इन नियमों के तहत बैंकिंग सेल्स से जुड़ी रणनीतियों में खासा बदलाव आएगा।

अब तक ऐसा देखा जाता रहा है कि ग्राहक लोन लेने या खाता खुलवाने बैंक जाता है और उसे साथ में बीमा, म्यूचुअल फंड या क्रेडिट कार्ड भी दे दिया जाता है। कई बार ग्राहक को पूरी जानकारी ही नहीं होती कि उसने किस चीज के लिए सहमति दी है। डिजिटल फॉर्म में एक ही I Agree बटन दबाने से कई सेवाओं की मंजूरी अपने आप जुड़ जाती थी।
बाद में पता चलता कि अनजाने में किसी अतिरिक्त प्रोडक्ट को भी व्यक्ति ने स्वीकार कर लिया है। RBI का मानना है कि इस तरह की प्रथाएं ग्राहकों के हित में नहीं हैं। इसलिए अब बैंकों को हर प्रोडक्ट के लिए अलग से, साफ और स्पष्ट सहमति लेनी होगी। नए नियमों के मुताबिक बैंक को यह जांचना होगा कि जो प्रोडक्ट वह बेच रहा है, वह ग्राहक की जरूरत और प्रोफाइल के अनुरूप है या नहीं।
डिजिटल प्लेटफार्म पर लेनी होगी अलग -अलग सहमति :
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अक्सर पहले से टिक किए गए बॉक्स या एक साथ कई शर्तों को स्वीकार कराने का तरीका अपनाया जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हर प्रोडक्ट के लिए अलग-अलग सहमति जरूरी होगी। ग्राहक को साफ बताया जाएगा कि वह किस चीज के लिए हां कह रहा है। बैंक को इसका रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होगा। इससे छुपे हुए एग्रीमेंट और उलझे हुए कंसेंट सिस्टम पर रोक लगेगी।
डाक पैटर्न पर सख्त RBI :
इसके साथ ही RBI ने उन डिजिटल तरीकों को भी निशाने पर लिया है, जिन्हें डार्क पैटर्न कहा जाता है। ये ऐसे तरीके हैं जिनसे ग्राहक को भ्रमित किया जाता है। जैसे पहले से टिक किया हुआ कंसेंट बॉक्स, आज आखिरी मौका जैसी घड़ी दिखाकर दबाव बनाना। अब बैंकों को अपने ऐप और वेबसाइट की नियमित जांच करनी होगी और ऐसे भ्रामक फीचर्स हटाने होंगे। जिससे कि डिजिटल बैंकिंग और ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी।
एजेंंटों की सूची करनी होगी सार्वजनिक :
अक्सर होता है कि बैंक शाखाओं में बैठे कुछ लोग असल बैंक कर्मचारी नहीं होते, बल्कि थर्ड पार्टी एजेंट होते हैं। ग्राहक उन्हें बैंक अधिकारी समझ लेते हैं। नए नियमों के तहत बैंक को ऐसे एजेंटों की सूची सार्वजनिक करनी होगी। उनकी ट्रेनिंग की जिम्मेदारी भी बैंक की होगी। वहीं एजेंट को बताना होगा कि वह बैंक का स्थायी कर्मचारी नहीं है। इसके अलावा, बैंक कर्मचारी और एजेंट ग्राहकों को सिर्फ तय ऑफिस समय में ही कॉल कर सकेंगे। इससे अनचाहे कॉल और दबाव वाली बिक्री में कमी आएगी।
1 जुलाई से लागू होंगे नियम :
फिलहाल ये ड्राफ्ट गाइडलाइंस हैं। 4 मार्च 2026 तक इन पर सुझाव दिए जा सकते हैं। नियम 1 जुलाई 2026 से लागू करने की योजना है। इससे पहले बैंकों को अपनी नीतियां, डिजिटल सिस्टम और एजेंट व्यवस्था में जरूरी बदलाव करने होंगे।औ