लातेहार : जल्द ही जिले में सरकारी डिग्री कॉलेज की कमी की समस्या समाप्त हो जाएगी। जिला मुख्यालय में एक साथ दो-दो डिग्री कॉलेज में पढ़ाई आरंभ होने जा रही है। सोमवार को नीलांबर पीतांबर यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉक्टर दिनेश कुमार सिंह ने लातेहार में बनकर तैयार महिला डिग्री कॉलेज और मॉडल डिग्री कॉलेज का निरीक्षण किया। उन्होंने आश्वास्त किया कि जल्द ही दोनों कॉलेज में पठन-पाठन का कार्य सुचारू रूप से आरंभ किया जाएगा।


उन्होंने बताया कि दोनों कॉलेज में जल्द ही सुचारू रूप से शिक्षण कार्य आरंभ करवाया जाएगा। इसके अलावा कॉलेज के कैंपस को भी विकसित किया जाएगा। कुलपति ने इस दौरान भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता को भी कई आवश्यक निर्देश दिए।

जिला बने हो गए 25 साल लेकिन अब तक नहीं खुला एक भी सरकारी डिग्री कॉलेज : 

बताते चलें कि लातेहार में एक भी सरकारी डिग्री कॉलेज नहीं है। जिसके कारण यहां के बच्चों को उच्च शिक्षा की पढ़ाई में परेशानी होती है। यहां के प्राइवेट कॉलेज में सिर्फ आर्ट्स की पढ़ाई होती है। यदि किसी बच्चे को साइंस की पढ़ाई करनी हो तो उसे लातेहार से बाहर जाना पड़ता है।

लातेहार को जिला बने लगभग 25 साल हो चुके हैं। बावजूद इसके जिले में एक भी सरकारी डिग्री कॉलेज नहीं होने से स्थानीय बच्चे पढ़ाई में पिछड़ रहे थें। हालांकि जिला मुख्यालय के पास गोवा गांव में मॉडल कॉलेज और बिशनपुर रोड पर महिला डिग्री कॉलेज के भवन बनकर तैयार हैं लेकिन यहां अब तक पढ़ाई प्रारंभ नहीं हो पाई है।

जिसके कारण इसका लाभ छात्रों को नहीं मिल पा रहा था। जिसे लेकर लोगों में खासी नाराजगी थी। निरीक्षण के दौरान डीडीसी सैय्यद रियाज अहमद भी उपस्थित रहे।

विद्यार्थियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना पहली प्राथमिकता है। कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ यहां कॉलेज स्टाफ के लिए भी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
डॉ. दिनेश कुमार सिंह, कुलपति, नीलांबर पीतांबर यूनिवर्सिटी

 

आर्थिक रुप से कमजोर बच्चों को होगी सहूलियत : 

लातेहार में मॉडल डिग्री कॉलेज और महिला डिग्री कॉलेज आरंभ होने से यहां के गरीब बच्चों को काफी सुविधा मिलेगी। संपन्न घर के बच्चे तो बाहर जाकर बेहतर शिक्षा ग्रहण कर लेते हैं लेकिन जिन बच्चों के माता-पिता आर्थिक रूप से संपन्न नहीं हैं, उनके बच्चों की या तो पढ़ाई छूट जाती है या फिर उन्हें अपना संकाय बदलना पड़ता है। कॉलेज खुल जाने के बाद बच्चों को कम खर्चे में ही बेहतर शिक्षा मिल पाएगी।

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