गढ़वा : गढ़वा जिले में कार्यरत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के नियमित एवं अनुबंधित पारा मेडिकल कर्मियों (एएनएम, जीएनएम, प्रयोगशाला तकनीशियन आदि) ने सामूहिक रूप से उपायुक्त गढ़वा को पत्र लिखकर असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा किए जा रहे “अकारण सामूहिक स्थानांतरण” का विरोध किया है।

कर्मियों का कहना है कि वे सभी बहुत ही कम मानदेय पर पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रहे हैं, इसके बावजूद अचानक और बिना किसी स्पष्ट निर्देश के उनका स्थानांतरण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया सिर्फ गढ़वा जिले में ही की जा रही है, जबकि झारखंड के अन्य किसी भी जिले में ऐसा नहीं हो रहा है। कर्मियों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में न तो राज्य स्तर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक और न ही स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव द्वारा कोई निर्देश जारी किया गया है।

इस स्थानांतरण को मानसिक और आर्थिक शोषण बताते हुए कर्मियों ने इसे असंवैधानिक और अमानवीय बताया है। उन्होंने उपायुक्त से मांग की है कि इस प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए। साथ ही, स्थानांतरण के लिए मांगे गए विवरणी का प्रारूप भी अपने पत्र के साथ संलग्न किया है।

ज्ञातव्य हो कि असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, गढ़वा ने 19 जुलाई 2025 को पत्र संख्या-191 के माध्यम से सभी अधीनस्थ संस्थानों को यह निर्देश दिया था कि जो कर्मी पिछले पाँच वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं, उनकी सूची कागज और गणना पंजी (एक्सेल) में दो दिनों के भीतर भेजी जाए। इस आदेश के बाद ही कर्मियों में भारी असंतोष देखा जा रहा है।

इन कर्मियों ने अपनी बात राज्य के स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों तक भी पहुँचाई है, जिनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव शामिल हैं। कर्मियों ने कहा कि वे कोई आंदोलन नहीं करना चाहते, वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि उन्हें बिना कारण और बिना किसी नीति के इधर-उधर न भेजा जाए और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ न किया जाए।

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