लाइव पलामू न्यूज/मेदिनीनगर : रविवार को कवि राकेश कुमार के संपादन में पलामू के पाँच छांदस रचनाकारों राकेश कुमार,नीरज कुमार पाठक,रीना प्रेम दूबे,अनुज कुमार पाठक और रमेश कुमार सिंह रचित पुस्तक ‘कुण्डलिया पंचामृत’ का भव्य लोकार्पण किया गया। चैनपुर के प्रखण्ड सभागार में मुख्य अतिथि झारखण्ड के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष इंदरसिंह नामधारी,सभाध्यक्ष प्रो सुभाष चंद्र मिश्र,डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह,डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र, प्रेम भसीन,श्रीधर प्रसाद द्विवेदी, सुरेंद्र कुमार मिश्र,रामाधार सिंह,धन्नजय जयपुरी, विनय मामुली बुद्धि व रविशंकर पाण्डेय ने संयुक्त रूप से ‘कुंडलियां पंचामृत’ का लोकार्पण किया। संचालन शोधार्थी विद्या वैभव भारद्वाज ने किया।

मौके पर मुख्य अतिथि इंदर सिंह नामधारी ने कहा कि पलामू चाहे विकास के क्षेत्र में अभी भी पिछड़ा है,किंतु साहित्य सृजन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। ‘कुण्डलिया पंचामृत’ के पाँचों कवियों ने इस यात्रा को आगे बढ़ाया है। इसलिए वे बधाई व प्रशंसा के पात्र हैं।
वहीं सभाध्यक्ष प्रो. सुभाष चंद्र मिश्र ने कहा कि वर्षों पहले मैंने कवि राकेश कुमार में काव्य प्रतिभा देखी थी। आज खुशी है कि ये साहित्य के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। पांचों कवियों की कुंडलियां संदेशपरक व पठनीय हैं।
विशिष्ट अतिथि साहित्यकार व काष्ठकलाकार प्रेम भसीन ने कहा कि साहित्यकारों के बीच बैठना मुझे आह्लादित करता है। मुझे इन कवियों की प्रतिभा व इनकी रचनाओं पर फक्र है। विशिष्ट अतिथि सिद्धेश्वर सिंह ने कवि राकेश कुमार की ‘मछली’ कुण्डलिया की सराहना करते हुए कहा कि इतना अच्छा लिखना साहित्य साधना के बिना संभव नहीं है। उन्होंने गिरिधर कविराय को स्मरण करते हुए कहा कि ‘कुण्डलिया पंचामृत’ के सभी रचनाकार बधाई के पात्र हैं।
साहित्यकार सुरेन्द्र कुमार मिश्र ने कहा कि पलामू के साहित्यकार कवि राकेश जी के संपादन में साझा संकलन निकाल रहे हैं जो मैथिलिशरण गुप्त और भारतेंदु हरिश्चंद्र की परंपरा की याद दिलाता है इसमें कवि राकेश जी की रचनात्मक भूमिका प्रशंसनीय है।
समकालीन जबावदेही के संपादक डॉ सुरेन्द्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि कुण्डलिया पंचामृत में विविध विषय समाहित हैं जो उत्तम शिल्प में लिखे गये हैं। इसलिए यह जीवन को सीधे स्पर्श करते हैं। साथ ही हिन्दी साहित्य भारती के बैनर तले साथ मिलकर निरंतर आगे बढ़ने की सकारात्मक एवं प्रेरक प्रवृत्ति भी दिखायी पड़ती है।
कुंडलियां पंचामृत इसी का प्रतिफल है। इसके पहले विषय प्रवेश कराते हुए छंदशास्त्री श्रीधर प्रसाद द्विवेदी ने प्राकृत भाषा में कुण्डलिया छन्द के आरम्भ से गिरिधर कविराय से होते हुए ‘कुण्डलिया पंचामृत’ तक के सफर पर प्रकाश डाला तथा कहा कि कवि राकेश कुमार का सम्पादन त्रुटिरहित है तथा इसमें संकलित सभी कवियों की कुंडलिया लेखन के कसौटी व उद्देश्यों को पूरा करती हैं।
प्रखर वक्ता परशुराम तिवारी जी ने कहा कि यह देखना सुखद है कि कवि राकेश कुमार सहित कुण्डलिया पंचामृत के सभी कवि कुंडलियां में नया प्रयोग करने में सफल रहे हैं।राष्ट्रीय सेवा मंच के अध्यक्ष प्रियरंजन पाठक एवं सचिव प्रेम प्रकाश दुबे द्वारा सभी रचनाकारों को सम्मानित किया।
मौके पर अनुपमा तिवारी,श्यामलाल उराँव,सरिता दुबे,नीरज कुमार,अजय पांडेय,शशि प्रसाद,विद्या सागर शर्मा,सुमन मिश्रा,आदर्श राज,शान्वी,ओम पाठक, कामेश्वर सिंह,बिमल कुमार,मधु रानी लाल,उदय भानु तिवारी,उमेश कुमार पाठक रेणु,रविशंकर पांडेय,विजय पाठक द्विज,अरविंद तिवारी,रमेश वैद्यनाथ,राम प्रवेश पंडित ,धन्नजय पाठक,सुनील विश्वकर्मा, अनिल कुमार शर्मा,छेदी नन्दन मिश्र,प्रेम प्रकाश दुबे,प्रिय रंजन पाठक,चंद्रकांत सिंह,कुमार अखिलेश, प्रमिला सिंह,नवीन कुमार सिंह,ज्योति सिंह,नागेंद्र पाठक,अशोक मिश्र,प्रेम प्रकाश पांडेय,राम प्यारी सहित सैकड़ों साहित्यकार व साहित्य प्रेमी उपस्थित थें।