मेदिनीनगर : शहर में 11000 वोल्ट के सभी तार लगभग जर्जर हो गए हैं । लगभग पांच छ दशक पहले का इंसुलेटर और तार से ही आज भी बिजली आपूर्ति हो रही है ।जबकि इंसुलेटर में अंकित समय के हिसाब से इसे बदला जाना चाहिए था। उक्त बातें कही वरदान चैरिटेबल ट्रस्ट की सचिव सह समाजसेवी शर्मिला वर्मा ने।

आगे उन्होंने कहा कि बेलवाटिका चौक पर तार गिरने से आज एक बड़ा हादसा होते होते बचा । रामनवमी आते ही वैसे भी मेदिनीनगर वासी छब्बीस साल पहले हुए हादसे को याद कर सिहर उठते हैं । वैसे ही किसी बड़े हादसे का इंतजार शायद यहां के बिजली विभाग और जन प्रतिनिधियों को है ।तभी तो आएंगें मातमपूर्सी करने। 11 हजार वोल्ट के अंडरग्राउंड वायरिंग की बातें अबतक धरी की धरी रह गईं।
किसी जनप्रतिनिधि ने इसपर सुध नहीं ली। केबल भी बिछाया गया, राशि निकासी भी हुई लेकिन रिजल्ट कुछ नहीं। गर्मी आते ही बिजली की आंख मिचौली शुरू है । खासकर न्यू पीएचडी फीडर की जनता इससे काफी त्रस्त है । सुबह उठते ही बिजली कटी रहती है , आप कुछ नहीं कर सकते । झारखंड के साथ ही छत्तीसगढ बना था , वहां की व्यवस्थाएं देखी जाएं ।
यहां ऊपर से नीचे तक सभी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं ।उनका काम जेनरेटर के भरोसे आराम से चल रहा है लेकिन आम जनता हलकान परेशान है। कई घरों और दुकानों में आग लग जा लही है , रात को ऐसा हादसा होने से सैकड़ों जानें चली जातीं । सुबह दूध लेने वालों की भीड़ थी इसलिए हादसा होते होते बचा।
न्यू पीएचडी फीडर के लिए सब स्टेशन में जो ब्रेकर लगा है वो भी सही तरीके से काम नहीं करता है। जबकि ब्रेकर को तुरंत ट्रिप करना चाहिए। वो नहीं होता। काश ! शासन, प्रशासन का ध्यान इस ओर जाए और मेदिनीनगर वासी खुद को सुरक्षित महसूस करें।